पंजाब के सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह
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छह विधायकों को कैबिनेट का रैंक देने का मामला पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट पहुंच गया है। मामले को संविधान के खिलाफ बताते हुए याचिका दायर की गई। पंजाब सरकार ने विधायक तरसेम सिंह रंधावा, कुलजीत सिंह नागरा, इंदरबीर सिंह बलारिया, कुशलदीप सिंह ढिल्लों, अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग और सांगत सिंह गिलजियां को कैबिनेट रैंक दिया। लेकिन इसे संविधान के 91 वें संशोधन का उल्लंघन करार देते हुए जनहित याचिका के माध्यम से चुनौती दी गई है। एडवोकेट जगमोहन सिंह भट्टी ने यह याचिका दाखिल की है।
उन्होंने पहले ही पंजाब में तय संख्या से अधिक मंत्रियों की नियुक्ति के खिलाफ भी जनहित याचिका दायर की हुई है। मंगलवार को हाईकोर्ट की रजिस्ट्री में यह जनहित याचिका दायर कर दी गई है जिस पर हाईकोर्ट जल्द सुनवाई करेगा। भट्टी ने याचिका में हाईकोर्ट को बताया है कि पंजाब मंत्रिमंडल में पहले ही 18 मंत्री हैं और यह तय संख्या से अधिक हैं। अब और छह विधायकों को कैबिनेट रैंक का दर्जा दे दिया गया है। इस लिहाज से अब मुख्यमंत्री सहित 25 विधायकों के पास कैबिनेट रैंक का दर्जा हो गया है।
भट्टी ने कहा कि संविधान के 91 वें संशोधन में साफ है कि विधानसभा में कुल विधायकों के 15 प्रतिशत से अधिक को मंत्रिमंडल में शामिल नहीं किया जा सकता है। पंजाब विधान सभा में 117 सदस्य हैं जिसका 15 प्रतिशत 17 होता है। पंजाब मंत्रिमंडल में 18 मंत्री हैं और एडवोकेट जनरल के पास भी कैबिनेट रैंक है इस तरह 19 के पास पहले ही कैबिनेट रैंक है। इसके खिलाफ पहले ही एक जनहित याचिका हाईकोर्ट में विचाराधीन है। अब सोमवार को सरकार ने छह विधायकों को भी कैबिनेट रैंक दे दिया है जो कि सीधे तौर संविधान के 91 वें संशोधन का उल्लंघन है।