मेयर आशा जसवाल, पार्षद रविकांत और राजेश कुमार के खिलाफ मलोया थाने में दर्ज मामले में पुलिस की ओर से एफआईआर खारिज करने की याचिका जिला अदालत ने मंजूर कर ली है। अदालत ने यह आदेश शिकायतकर्ता सोशल वेलफेयर डिपार्टमेंट की डायरेक्टर निशू सिंघल के बयान के बाद दिए। अदालत से मंजूरी मिलने के बाद अब कोर्ट के आदेश के कॉपी के साथ जांच रिपोर्ट पुलिस एसएसपी कार्यालय को भेजेगी। उसके बाद ही एफआईआर खारिज हो सकेगी।
इससे पहले शुक्रवार को निशू सिंघल ने अदालत में दिए बयान में कहा कि वह घटना के वक्त मौके पर नहीं थी। उन्हें अगले दिन इसकी जानकारी मिली थी। उसी आधार पर उन्होंने मामले में पुलिस को शिकायत दी थी। लेकिन, अब वह पुलिस की जांच से संतुष्ट हैं और मामले में आगे कोई कार्रवाई नहीं चाहती हैं। उन्हें पुलिस की एफआईआर खारिज करने की याचिका पर कोई आपत्ति नहीं है।
निचली अदालत से नहीं मिली थी राहत
मलोया थाना पुलिस की ओर से सबसे पहले इलाका मजिस्ट्रेट की कोर्ट में मेयर आशा जसवाल, पार्षद रविकांत और राजेश कुमार के खिलाफ जुवेनाइल जस्टिस ,पॉक्सो एक्ट समेत विभिन्न धाराओं में दर्ज मामले की एफआईआर खारिज करने की अपील की थी।
इस पर सिविल जज की अदालत ने एफआईआर में दर्ज 332, 353, 342, 228-ए, 448, 506 और 34 आईपीसी की धाराओं को तो केस से हटाने की मंजूरी दे दी, लेकिन जुवेनाइल जस्टिस (जेजे) एक्ट और पॉक्सो एक्ट की धाराओं को यह कहते हुए मंजूर नहीं किया कि उनके पास इनकी ज्यूरिडिक्शन नहीं है।