चंडीगढ़ के पंजाब कला भवन में थियेटर फेस्टिवल का पहला दिन
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पंजाब कला भवन में माहौल उस समय गमगीन हो गया, जब पैसे की चाहत में बदलते रिश्तों की मार्मिंक कहानी देखने को मिली। पंजाब कला भवन में दो दिवसीय थिएटर फेस्टिवल की शुरुआत शनिवार से हुई। फेस्टिवल युगांतर आर्ट्स और आरएसएमए इंटरप्राइज, बीपीसीएल की ओर से किया जा रहा है। शनिवार 30 अप्रैल को बदलते रिश्ते नाटक का मंचन किया गया। इसे अश्विनी कुमार ने लिखा और चरणजी लुबाना ने निर्देशन किया है।
नाटक में दिखाया गया कि ऐश और आराम व बेशुमार दौलत पाने की चाहत इंसान को इस कदर पागल बना देती है। उसे सिर्फ पैसे ही दिखाई देते हैं। रिश्ते नाते के साथ सही गलत का भी उसे पता नहीं चलता। नाटक में दो सहेलियों नीलू और सुजाता की कहानी दिखाई गई है। जो मध्यवर्गीय परिवार से है। दोनों एक साथ पढ़ती हैं। दोनों की गहरी दोस्ती है। लेकिन दोनों अलग-अलग विचारधारा की हैं। सुजाता अपने माता-पिता की पसंद से नौकरी करने वाले लड़के से शादी करती है।
वहीं नीलू ऐशो आराम की जिंदगी जीना चाहती है और बेशुमार दौलत शोहरत पाना चाहती है। इसके लिए वह किसी बड़े बिजनेसमैन से शादी करती है। जो उससे उम्र में बहुत बड़ा होता है। उसका पति बिजनेस के सिलसिले में व्यस्त रहता है। लिहाजा वह अपनी पत्नी के लिए समय नहीं निकाल पाता। जिसके चलते नीलू शादी से पहले अपने पुराने मित्र के संपर्क में आ जाती है और उसे अपने पति की कंपनी में लगवा देती है।
इस बात का जब उसके पति को पता चलता है तो वह उससे तलाक ले लेता है। लेकिन तलाक से नीलू को अच्छी खासी रकम मिल जाती है। वह बेपरवाह होकर पैसाें से ऐशो आराम की जिंदगी जीने लगती है। वहीं उसका मित्र भी उसे छोड़कर चलता जाता है। अंत में वह अकेली रह जाती है। वहीं दूसरी ओर, उसकी सहेली सुजाता का पति ईमानदारी से जीवन जीता है और उसके बच्चे भी अच्छी नौकरी में लग जाते हैं।
नाटक में इन्होंने निभाया रोल
सुविंदर पाल विक्की, सुषमा गांधी, मनी सभ्रवाल, गुरप्रीत धालीवाल, चरणजीत लुबाणा, अश्विनी कुमार, किरणप्रीत कौर और गोल्डी शर्मा। सभी कलाकाराें का बलजीत बालाजी ने मेकअप किया।