पंजाब कला भवन चंडीगढ़ में रविवार को एक वार ते कहना सी नाटक का मंचन किया गया, जिसमें अनकहे जज्बात देखने को मिले। इसे पंजाबी नाटक एकेडमी मोहाली की ओर से आयोजित किया गया। यह नाटक अनकहे जज्बातों की कहानी है।
कादर और मकलूक नामक लड़की के इर्द-गिर्द नाटक घूमता है। कादर मकलूक की सादगी को देखकर उसे पसंद करता है। वहीं, मकलूक अपने आप को कादर की नजरों में और अधिक सुंदर दिखने के लिए ओवर मेकअप करने लगती हैं।
यह बात कादर को बुरी लगती है। लेकिन वह उसे कह नहीं पाता और मन में रखता है। धीरे-धीरे दोनों में गलतफहमी पैदा हो जाती हैं। मन में ठान लेते हैं कि सभी यादें खत्म कर देते हैं। इस कारण कादर और मकलूक नदी किनारे पहुंच जाते हैं। वहां एक किश्ती होती है।
दोनों नाव का एक-एक चप्पू लेकर चलाने लगते हैं। वहां पर कादर की नाराजगी जाहिर होती है। मकलूक उससे कहती है अगर यही बात थी तो मुझे एक वार ते कहना सी। इसके बाद नाटक की कहानी खत्म हो जताती है।