खूबसूरत गार्डन में रंग-बिरंगे परिंदों का डेरा है। आपकी आंख सुंदर पक्षियों के चहचहने से खुले। ऐसा सब चाहते हैं। मगर परिंदे तो तभी आएंगे जब बगीचे में उनके लिए कुछ होगा। हम आज आपको उन पेड़ पौधों की जानकारी देंगे, जिन्हें लगाने से आपके बगीचे में भी पक्षी खूब चहचहाएंगे।
शहतूत: तूत या मलबेरी पर मई-जून में फल आते हैं। यह एक श्रेष्ठ हेल्थ फ्रूट है। पक्षियों की साठ से अधिक प्रजातियां शहतूत के फल खाती हैं। यह पेड़ अगर आपके बगीचे में होगा तो तोता, मैना, बटेर, नीलकंठ, गुलाबी तिलियर, कोयल, हरियल, बसंता और बया आदि आपके बगीचे में आएंगे।
पिलखन: पिलखन के फल भी पक्षी चाव से खाते हैं। तोता, कबूतर, हरियल, बसंता, धनेश (ग्रे होर्नबिल), मैना, फाख्ता और मौर आदि के अलावा कई प्रवासी पक्षी भी पिलखन पर आते हैं।
अंजीर: फरवरी अंत से मार्च तक अंजीर पर फल रहते हैं और इस दौरान खूब पक्षी इस पेड़ पर चहचहाते हैं। इनमें देसी गौरेया, कबूतर, तोता, बुलबुल, मैना तो शामिल है हीं यूरोपीय देशों से आने वाले सुंदर रोबिन और स्टार्लिंग भी इन्हें चाव से खाते हैं।
नीम: घनी छाया और एंटीबायोटिक गुण के लिए नीम इंसानों के लिए तो महत्त्व रखता ही है मगर जून से जुलाई में जब निमोलियां पकती हैं तो तोता, गौरेया, कबूतर, बुलबुल, धनेश, गुटार, अबलकी, फाख्ता, मैना आदि दिनभर डेरा जमाए रहते हैं।
आम: मई से जुलाई तक फलों के राजा आम पर खूब रौनक रहती है। अगर आपके बगीचे में यह पेड़ होगा तो आप चंड़ीगढ़ के स्टेट बर्ड धनेश (ग्रे हॉर्नबिल), तोता, कोयल आदि पक्षी आपको खूब दिखेंगे।
शकरखोरे भी आएंगे
अगर आप चाहते हैं कि रंग-बिरंगे शकरखोरे (सन बर्ड) आपके बगीचे में चहचहाएं तो आप सेमल, फरहद (इंडियन कोरल ट्री), ढाक, गुड़हल और रोहितका के पेड़ लगा सकते हैं। इनका नेक्टर पीने के लिए सुनखी, केशराज (स्पेंगल्ड ड्रोंगो) खिंचे चले आएंगे।
घोसला भी बनाएंगे
ज्यादातर पक्षी अपना घोसला कंटीले पेड़ों जैसे कीकर, बेर, पाम, बेल, खजूर आदि के पेड़ पर बनाते हैं। इसकी वजह यह है कि इन पेड़ों पर सांप, नेवले और बिल्लियां नहीं आतीं और पक्षियों के अंडे तथा बच्चे सुरक्षित रहते हैं।