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निजी सिक्योरिटी गार्ड्स को अब सरकारी ट्रेनिंग और सर्टिफिकेट

Tue, 03 May 2016 01:50 AM IST
बलवान करिवाल/अमर उजाला, चंडीगढ़
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सिक्योरिटी गार्ड - फोटो : demo pics
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पहली बार प्रशासन प्राइवेट सिक्योरिटी एजेंसियों और सिक्योरिटी गार्ड्स का डाटाबेस तैयार करेगा। डाटाबेस तैयार होने के बाद अपने स्तर पर वेरिफिकेशन भी कराएगा। इतना ही नहीं सिक्योरिटी गार्ड्स को अब प्रशासन ही ट्रेनिंग देगा। ट्रेनिंग सर्टिफिकेट मिलने के बाद किसी व्यक्ति को सिक्योरिटी गार्ड लगाया जा सकेगा। अभी तक प्राइवेट एजेंसियां अपने स्तर पर ही यह सब करती हैं।
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यह सब प्राइवेट सिक्योरिटी एजेंसियों के रेग्युलेशन एक्ट (पसारा)-2005 के तहत होगा। इस एक्ट के पायलट प्रोजेक्ट के लिए केंद्र सरकार ने चंडीगढ़ को चुना है। जिसमें सिक्योरिटी एजेंसी, गार्ड्स और बैंक सिक्योरिटी वैन के लिए नियम बनाए जाएंगे। पिछले सप्ताह ही प्रशासन को केंद्र सरकार ने ऐसे आदेश दिए हैं। जिसके बाद प्रशासन ने इस पर काम भी शुरू कर दिया है।

चंडीगढ़ में 103 सिक्योरिटी एजेंसियां पंजीकृत हैं। जबकि 23 के करीब ने पंजीकरण के लिए आवेदन किया हुआ है। इसके अलावा भी बहुत सी एजेंसियां बिना पंजीकरण के चल रही हैं। प्रशासन के पास केवल इनकी संख्या का रिकॉर्ड है। एजेंसी के ऑफिस और कर्मचारियों की संख्या जैसा कोई रिकॉर्ड नहीं है। जिस कारण कई बार शिकायतें सामने आती रहती हैं। पायलट प्रोजेक्ट में ही ऑनलाइन पंजीकरण की सुविधा भी उपलब्ध होगी। पंजीकरण के लिए बाबुओं के चक्कर नहीं लगाने होंगे।
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कैश कैरिंग वैन सेफ मॉड्यूल पर होगा काम: कैश कैरिंग वैन सेफ मॉड्यूल पर भी चंडीगढ़ में काम होगा। इसके तहत बैंक की नगद राशि ले जाने वाली वैन के लिए नियम कायदे बनाए जाएंगे। यह वैन कैसी हो इसके लिए गाइडलाइंस तैयार होगी। यह वैन बैंक से बैंक और बैंक से एटीएम तक नगद रकम पहुंचाती है। वैन में तैनात सुरक्षा कर्मियों के लिए योग्यता भी तय होगी। इसे लेकर प्रशासन बैंकों के साथ एक मीटिंग भी कर चुका है। एक महीने में मॉड्यूल का अधिकतर काम पूरा कर लिया जाएगा।

सैलरी संबंधी दिक्कतें होंगी दूर: सिक्योरिटी एजेंसियों पर डीसी रेट के तहत सैलरी नहीं देने और पीएफ नहीं काटने जैसे आरोप लगते रहे हैं। बहुत सी एजेंसियां सुरक्षा कर्मियों से 12-12 घंटे ड्यूटी कराती हैं। नया एक्ट लागू होने से कर्मचारियों का शोषण रुकेगा और उन्हें पूरा पैसा मिलेगा।

रुकेंगी बैंक संबंधी वारदात: बैंक संबंधी बहुत लूट और अन्य वारदातों में वहीं के सिक्योरिटी गार्ड की ही मिलीभगत सामने आती है। अब सिक्योरिटी गार्ड का पूरा रिकॉर्ड प्रशासन के पास होगा। गार्ड को ट्रेनिंग भी प्रशासन ही देगा। ऐसे में जवाबदेही बढ़ेगी और ऐसी वारदात रुकेंगी।

अजीत बालाजी जोशी, डीसी, चंडीगढ़ ने बताया कि पसारा एक्ट के पायलट प्रोजेक्ट की देशभर में चंडीगढ़ को जिम्मेदारी मिली है। इसमें सभी सिक्योरिटी एजेंसियों और सिक्योरिटी गार्ड्स का डाटाबेस तैयार होगा। गार्ड्स को ट्रेनिंग भी प्रशासन ही देगा। केंद्र सरकार से मंजूरी के बाद प्रशासन ने इस पर काम शुरू कर दिया है।
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