पीजीआई की माइक्रोबायोलॉजी लैब ने एक नया इतिहास रच दिया है। यह देश की पहली ऐसी लैब बन गई है, जिसे राष्ट्रीय परीक्षण और अंशशोधन प्रयोगशाला प्रत्यायन बोर्ड (एनएबीएल) ने अधिकृत कर दिया है।
इससे मरीजों और मेडिकल टूरिज्म को काफी फायदा पहुंचेगा। मरीजों को समय पर रिपोर्ट तो मिलेगी ही साथ ही उनकी रिपोर्ट विदेशों में भी मान्य होगी।
एनबीएल ने की निगरानी :
पीजीआई के डायरेक्टर वाइके चावला ने शुक्रवार को एक प्रेस वार्ता में बताया कि यह संस्थान के लिए गर्व की बात है।
इसके लिए चतुर्थ श्रेणी का कर्मचारी हो या फिर फैकल्टी मेंबर, हर किसी का योगदान रहा। सभी ने समय पर क्वालिटी वर्क दिया।
इस वर्क स्टैंडर्ड को काफी दिन तक एनबीएल ने निगरानी की और उसके बाद लैब को अधिकृत किया। उन्होंने बताया कि प्राइवेट सेक्टर की कई लैब एनएबीएल से अधिकृत है, लेकिन सरकारी क्षेत्र में यह देश की पहली लैब है।
ऐसे बढ़ाया स्टैंडर्ड :
डायरेक्टर चावला के मुताबिक माइक्रोबायोलॉजी लैब का स्टैंडर्ड बढ़ाने के लिए कई आधुनिक मशीने खरीदी गईं। इसमें से प्रमुख रूप से मालडी-टोफ टेक्नीक है।
इस तकनीक ने सभी जांच रिपोर्ट का परिणाम का समय कम कर दिया है। उदाहरण के तौर पर किसी इंफेक्शन की टेस्ट रिपोर्ट आने में दो दिन का समय लगता था, लेकिन अब यह कुछ ही घंटे में आ जाएगी। यदि देरी होगी तो लैब को इसका कारण भी स्पष्ट करना होगा। लैब में करीब 25 टेस्ट होते हैं।
रोजाना 1200 सैंपल टेस्ट
माइक्रोबायोलाजी लैब में रोजाना 1200 सैंपल जांच के लिए आते हैं। इसमें मुख्य रूप से इंफेक्शन, बैक्टीरिया जांच, टीबी, फंगल और अन्य रोगों के सैंपल लिए जाते हैं।
पहले जांच रिपोर्ट का समय तय नहीं था, लेकिन अब हर एक जांच रिपोर्ट का समय तय कर दिया गया है। देरी होने पर लैब को कारण बताना होगा।