चंडीगढ़। पीजीआई में कर्मचारियों की प्रमोशन स्कीम को लेकर विवाद एक बार फिर गहरा गया है। केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (कैट) ने अवमानना याचिका को पुनः बहाल करते हुए मामले की अगली सुनवाई 31 जुलाई 2026 तय की है। 27 मार्च 2026 को हुई सुनवाई के दौरान कैट ने माना कि स्कीम को लगातार लागू नहीं किया गया और केवल एक बार का लाभ देकर आदेशों की अवहेलना की गई है। इस मामले में पीजीआई और केंद्र सरकार उच्च न्यायालय व सर्वोच्च न्यायालय तक गए, लेकिन सभी याचिकाएं खारिज हो चुकी हैं। ऐसे में कैट का 10 जुलाई 2013 का आदेश अंतिम रूप से बरकरार है। इसके बावजूद कर्मचारियों को पूर्ण लाभ नहीं मिलने पर मामला फिर अवमानना के दायरे में आ गया है। इसी संबंध में एक कर्मचारी ने याचिका दायर की है।
मामला बैकलॉग प्रमोशन स्कीम को निरंतर आधार पर लागू न करने से जुड़ा है। कैट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया था कि यह स्कीम एक बार की प्रक्रिया नहीं, बल्कि निरंतर लागू की जानी चाहिए। साथ ही कटऑफ तिथि को भी तर्कहीन और मनमाना बताया गया था। हालांकि, पीजीआई प्रशासन ने 3 फरवरी 2021 को आदेश जारी कर स्कीम लागू की, लेकिन इसे एकमुश्त लाभ तक सीमित रखा। इसके तहत 1982 में क्लर्क नियुक्त एक कर्मचारी को 8 जुलाई 1990 से केवल एक प्रमोशन दिया गया। आरोप है कि इसके बाद 1998, 2006 और 2014 में मिलने वाले अगले प्रमोशन का लाभ नहीं दिया गया, जबकि कैट के निर्देशों के अनुसार स्कीम को लगातार लागू किया जाना चाहिए था।