पीजीआई के ठेका आधार करीब दो हजार कर्मचारियों को राहत देते हुए पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने सीजेएम की कोर्ट द्वारा पीजीआई के सीनियर एडमिनिस्ट्रेशन अफसर (एसएओ) और चीफ सिक्योरिटी अफसर (सीएसओ) को जारी सम्मन पर रोक लगा दी है। ठेका आधार प्रथा समाप्त होने का अनुपालन नहीं करने पर सीजेएम ने एक सूट पर इन दोनों अधिकारियों को सम्मन किया था और इन सम्मनों को पीजीआई प्रशासन ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।
हाईकोर्ट के इस आदेश से अब ठेका आधार पर पीजीआई में दो हजार से अधिक कर्मचारियों पर नौकरी चले जाने का खतरा फिलहाल टल गया है। हाईकोर्ट में दायर याचिका में पीजीआई ने कहा कि लागत कम करने के मद्दे नजर वर्ष 1996 में स्टैंडिंग फाइनांस कमेटी ने हॉस्पिटल अटैंडेंट, सैनेटरी अटैंडेंट, बियरर और सिक्योरिटी गार्ड्स जैसे चौथा दर्जा कर्मचारियों को ठेका आधार पर रखने की सिफारिश की थी और गवर्निंग बाडी ने इसे मंजूरी दे दी थी। इसके बाद कमेटी ने 2005 में नियमित भर्ती की सिफारिश करते हुए, फिलहाल ठेका आधार प्रथा की बजाय आउट सोर्सिंग व्यवस्था अपनाने की सिफरिश भी की थी। यह सिफारिश भी गवर्निंग बाडी ने मंजूर कर ली थी और चार एजेंसियों को आऊटसोर्सिंग का काम सौंपा गया था।
हाईकोर्ट को बताया गया कि इसी दौरान संस्थान केनियमित कर्मचारियों ने सेंट्रल एडवाईजरी कॉन्ट्रेक्ट लेबर बोर्ड के समक्ष ठेका आधार प्रणाली को चुनौती दी थी और बोर्ड ने यह व्यवस्था खत्म करने की सिफारिश की थी। इस सिफारिश पर केंद्र सरकार ने नोटिफिकेशन जारी करके सेनिटेशन, सिक्योरिटी और कैटरिंग में अनुबंध सिस्टम खत्म करने को कहा था।
पीजीआई ने कहा कि इस आदेश के अनुपालन के लिए डिप्टी चीफ लेबर कमिश्नर ने पीजीआई को पत्र लिखा था, लेकिन पीजीआई ने अपनी मजबूरी बताई थी। याचिका में कहा कि इसके बावजूद डिप्टी चीफ लेबर कमिश्नर ने पीजीआई के खिलाफ केस डाल दिया।
हाईकोर्ट को बताया गया कि इस केस पर ही एसएओ और सीएसओ को सीजेएम कोर्ट ने सम्मन किया था। हाईकोर्ट को बताया गया कि नियमित भर्ती में समय लग सकता है और ठेका आधार कर्मचारियों का कांट्रेक्ट तुरंत खत्म नहीं किया जा सकता, लिहाजा सम्मन पर रोक लगाई जानी चाहिए। दलील दी कि पदों की मंजूरी लेकर नियुक्ति करने में भी लंबा समय लगेगा।
दूसरी ओर अनुबंध के आधार पर काम करने वाले कर्मचारियों को यदि नियमित करने पर विचार किया जाता है तो सेवा नियम आड़े आएंगे, क्योंकि इनके अनुसार ज्यादातर कर्मचारी नियमित नियुक्ति से अयोग्य हो जाएंगे। इस दलील के साथ केंद्र सरकार की ओर से पिछले साल जारी नोटिफिकेशन रद्द करने और लेबर विभाग द्वारा दर्ज मामले को रद्द करने की मांग पीजीआई ने की थी। हाईकोर्ट ने टिप्पणी की कि पीजीआई रातों रात नियमित भर्ती नहीं कर सकता। हाईकोर्ट ने दोनों अफसरों को जारी सम्मन पर रोक लगा दी है।