पीजीआई में मरीजों के साथ आने वाले तीमारदारों को अब बाहर पार्क में रात नहीं गुजारनी होगी। उन्हें पीजीआई में शरण मिलेगी। मरीजों और उनके तीमारदारों की बढ़ती संख्या को देखते हुए रेडक्रॉस ऐसे लोगों के लिए स्थायी सरांय बना रहा है। जिसका काम भी शुरू हो गया है। इस सरांय के बनने से सैकड़ों लोगों को फायदा होगा।
पीजीआई में नए पुराने मरीजों की रोजाना की ओपीडी 8 हजार से अधिक है। इमरजेंसी में आने वाले मरीजों की भी कतार लगी रहती है। जिस कारण पीजीआई में सरांय और गेस्ट रूम फुल रहते हैं। मरीजों के साथ उनके तीमारदार भी आते हैं। वार्ड में एक से अधिक तीमारदार को नहीं रुकने दिया जाता। जिस कारण उन्हें बाहर ही डेरा जमाना होता है।
सर्दियों में बनाए जाने वाले रैन बसेरा भी अंशकालिक होते हैं। बाद में इन्हें हटा दिया जाता है। इसके बाद पूरा वर्ष लोगों को खुले में रात गुजारनी होती है। इसी परेशानी को देखते हुए डीसी अजीत बालाजी जोशी ने रेडक्रॉस को पीजीआई में स्थायी सरांय बनाने के आदेश दिए थे।
जिसकी ड्राइंग फाइनल होने के बाद काम शुरू हो गया है। रेडक्रॉस के अधिकारियों के मुताबिक अगले कुछ महीनों में सरांय का काम पूरा हो जाएगा। लोगों को निशुल्क इसमें रुकने की इजाजत मिलेगी। रेडक्रॉस को कई अन्य वेलफेयर के वर्क के लिए भारत सरकार से 50 लाख रुपये की ग्रांट मिली है।