कार्डियक डेथ पेशेंट से किडनी निकालना और जरूरतमंद मरीजों में ट्रांसप्लांट कर पीजीआई ने इतिहास रचा है। अभी तक ब्रेन डेड पेशेंट से ही अंग निकालने की खबरें आई हैं। पीजीआई का दावा है कि इस तरह के ट्रांसप्लांट अब तक सिर्फ पीजीआई ने ही करने में कामयाबी हासिल की है। दो साल में छह कार्डियक पेशेंट से किडनी निकालकर 11 जरूरतमंद किडनी मरीजों में सफलतापूर्वक ट्रांसप्लांट की गई है।
सभी पेशेंट पूरी तरह से फिट हैं और वह अपनी नॉर्मल जिंदगी बिता रहे हैं। ये आंकड़े पीजीआई के रीनल ट्रांसप्लांट सर्जरी के डॉ. आशीष शर्मा ने शनिवार को पीजीआई में एक प्रेसवार्ता के दौरान पेश किए गए। उनके इस काम को काफी सराहा गया है। इंडियन सोसायटी आफ आर्गन ट्रांसप्लांटेशन की वार्षिक मीटिंग में उन्हें बेस्ट ओरल पेपर के अवॉर्ड से सम्मानित किया गया है।
चुनौतीभरा है कार्डियक पेशेंट से अंग निकालना
डॉ. आशीष शर्मा का कहना है कि ब्रेन डेड के मुकाबले कार्डियक डेथ पेशेंट से अंग निकालना काफी चुनौती भरा है। ब्रेन डेड पेशेंट को वेंटीलेटर पर रखकर तीन से चार दिन का इंतजार कर सकते हैं, लेकिन कार्डियक डेथ में ऐसा नहीं होता। 30 से 60 मिनट के भीतर अंग निकालना जरूरी होता है।
आईसीयू में कार्डियक डेथ घोषित करने के बाद मरीज को मसाज के जरिये जिंदा रखा गया और फिर अंग निकाले गए। अगर इसकी गाइडलाइंस बने तो अन्य अंग जैसे कि लीवर और पेनक्रियाज भी सुरक्षित निकाले जा सकते हैं।
ब्रेन डेथ और कार्डियक डेथ में अंतर
ब्रेन डेथ उसे कहते हैं, जिसमें डोनर के ब्रेन को छोड़कर बाकी अंग काम करते हैं। जबकि कार्डियक डेथ में हार्ट काम करना बंद कर देता है। ब्रेन डेथ डोनर में ब्लड प्रेशर को मेडिकेशन की मदद से कंट्रोल किया जा सकता है। जबकि कार्डियक डेथ मरीज में ऐसा नहीं किया जा सकता। ब्रेन डेथ डोनर से अंग निकालने में काफी समय रहता है, जबकि कार्डियक डेथ डोनर के साथ समय चंद मिनट का रहता है।
चंडीगढ़ ने सभी को पछाड़ा
कार्डियक डेथ डोनर से अंग निकालकर जरूरतमंदों में ट्रांसप्लांट करने से चंडीगढ़ ने आर्गन डोनेशन में एक और उपलब्धि हासिल कर ली है। चंडीगढ़ ने प्रति लाख जनसंख्या अंगदान के आधार पर 24.64 की दर हासिल की है, जो पूरे देश में सबसे ज्यादा है।