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16 अगस्त से शुरू हो जाएगा पीजीआई चंडीगढ़ का 250 बेड वाला नया अस्पताल, जानिए इसकी खूबियां

Sat, 27 Jul 2019 10:31 AM IST
खुशबू गोयल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
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पीजीआई का नया हॉस्पिटल - फोटो : अमर उजाला
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आखिरकार लंबे इंतजार के बाद पीजीआई चंडीगढ़ का 250 बेड का हॉस्पिटल बनकर तैयार हो चुका है। इसे 16 अगस्त से ट्रायल के तौर पर शुरू कर दिया जाएगा। यह फैसला पीजीआई की बैठक में लिया गया है। इसके साथ ही डिपार्टमेंट के एचओडी को जल्द से जल्द शिफ्ट करने के निर्देश भी जारी कर दिए गए हैं। नवनिर्मित हॉस्पिटल में नेहरू हॉस्पिटल से चार डिपार्टमेंट हीप्टोलॉजी, (लिवर), ईएनटी (कान, नाक, गला), रेडियोथैरेपी (कैंसर ट्रीटमेंट) और इंडोक्राइनोलाजी (डायबिटीज व हार्मोन) को शिफ्ट किया जा रहा है।
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साल 2010 से बन रहे इस हॉस्पिटल के शुरू हो जाने से इन चारों डिपार्टमेंट से संबंधित मरीजों को काफी फायदा होगा। अभी ये सारे डिपार्टमेंट नेहरू हॉस्पिटल में संचालित हो रहे थे। जगह कम होने के कारण वहां पर बेड की संख्या सीमित थी। जगह कम होने की वजह से गंभीर मरीजों को लंबे समय तक इंतजार करना पड़ता था। अब इन मरीजों को आसानी से पीजीआई में इलाज मिल सकेगा। नए हॉस्पिटल में 250 बेड के अलावा 78 प्राइवेट रूम, 10 माड्यूलर आपरेशन थियेटर बनाए गए हैं।

लिवर आईसीयू और रेडियोथैरेपी की बड़ी मशीनें नहीं होगी शिफ्ट
पीजीआई के सूत्रों ने बताया है कि शिफ्टिंग में देरी की एक वजह रेडियोथैरेपी की बड़ी मशीनें बन रही थीं। इन मशीनों की कीमत 20-25 करोड़ रुपये है। इन मशीनों के मुताबिक ही बिल्डिंग तैयार की जाती है। यदि इन मशीनों को नेहरू हॉस्पिटल से नेहरू एक्सटेंशन ले जाया गया तो दोनों जगह की बिल्डिंग को ही तोड़ना पड़ेगा। इसमें लाखों रुपये बेवजह खर्च होंगे। ऐसे में इन मशीनों को नेहरू हॉस्पिटल में ही फिलहाल रखे जाने का फैसला लिया गया है। इसके साथ ही लिवर आईसीयू को भी शिफ्ट नहीं किया जाएगा। हालांकि, अल्ट्रासाउंड व एक्सरे की सुविधा के लिए पोर्टेबल मशीन की व्यवस्था कर दी गई है।
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हॉस्पिटल में होंगी ये खूबियां

इस हॉस्पिटल को सेंट्रल पब्लिक वर्क्स डिपार्टमेंट (सीपीडब्ल्यूडी) ने तैयार किया है। यह भारत का पहला ऐसा सरकारी हॉस्पिटल है, जिसे ग्रीन बिल्डिंग बनाने के लिए प्लेटिनम सर्टिफिकेट मिला है। यह एक ऐसी बिल्डिंग है, जिसमें बिजली बचाने के हाईटेक उपकरण लगे हैं। जो हर साल चार करोड़ रुपये की बिजली और एक हजार लीटर पानी रोजाना बचाएगा।

ऑटोमेटेड मैटीरियल ट्रांसपोर्ट सिस्टम बनाया गया है, जिसकी मदद से सैंपल सीधे लैब में मात्र 30 सेकेंड में भेजे जा सकेंगे। अभी मरीज के अटेंडेंट को ले जाना पड़ता था। सेंट्रल एयर क्लीनर एसी की हवा को साफ करके भेजेगा, इससे इंफेक्शन का खतरा कम होगा। हॉस्पिटल के बाहर बने गार्डन में औषधीय पौधे लगाए गए हैं, जो दूषित हवा को साफ करने का काम करेंगे।

ग्राउंड फ्लोर पर फेकल्टी रूम, एडमिनिस्ट्रेशन, कैफेटेरिया व रेडिएशन थैरेपी विंग होगा। फर्स्ट फ्लोर पर ईएनटी के 47 वार्ड व माइनर ओटी होगी। दूसरे फ्लोर पर हीप्टोलाजी विंग व 45 बेड होंगे। साथ ही एंडोक्राइनोलाजी डिपार्टमेंट के साथ 36 बेड होंगे। तीसरे फ्लोर पर 78 प्राइवेट रूम होंगे, जबकि चौथे फ्लोर पर 10 ओटी, आईसीयू व सीसीयू होंगे।

नेहरू एक्सटेंशन ब्लॉक का काम पूरा हो चुका है। अगले दो हफ्ते के भीतर चारों डिपार्टमेंट को शिफ्ट करने के निर्देश दिए गए हैं। पूरी संभावना है कि 16 अगस्त से हॉस्पिटल को ट्रायल के तौर पर शुरू कर दिया जाए।
- प्रो. जगतराम, डायरेक्टर पीजीआई चंडीगढ़
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