डॉ. जगतराम का जन्म हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले के राजगढ़ के पबियाना गांव के एक गरीब व अनपढ़ किसान ध्यानूराम और फुलमु देवी के घर हुआ। डॉ. जगतराम ने गवर्नमेंट सीनियर सेकेंडरी स्कूल राजगढ़ से पढ़ाई शुरू की। गवर्नमेंट सीनियर सेकेंडरी स्कूल से पढ़ाई पूरी की।
उन्होंने आईजीएमसी शिमला से 1973 में एमबीबीएस में एडमिशन लिया। 1979 में पीजीआई ज्वाइन किया। प्रो. जगतराम ने बताया कि 40 साल पहले जब एमडी की परीक्षा देने आए थे, तब उनकी जेब में पैसे तक नहीं थे। दोस्तों ने फीस और रास्ते के किराए का इंतजाम किया था। उस दौर को वे कभी नहीं भूलते, क्योंकि वे घटनाएं उन्हें आज भी मजबूती देती हैं।
फर्श से अर्श तक सफर रहा खास
पीजीआई डायरेक्टर प्रो. जगतराम चिकित्सा के क्षेत्र में सराहनीय योगदान के लिए 2019 में पद्मश्री से नवाजे जा चुके हैं। 1978 में इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज शिमला से एमबीबीएस की डिग्री प्राप्त की। उसके बाद जून 1982 में पीजीआई के नेत्र विज्ञान में एमएस किया। बाद में उन्हें स्टॉर्म आई इंस्टीट्यूट यूएसए में उन्नत फेकमूल्सीफिकेशन के क्षेत्र में डब्ल्यूएचओ फेलोशिप से सम्मानित किया गया।
वर्ष 1998 में बाल चिकित्सा मोतियाबिंद सर्जरी में एक और फेलोशिप से सम्मानित किया गया था। भारत सरकार द्वारा उन्हें वर्ष 2003 से 2005 तक एक सलाहकार नेत्र रोग विशेषज्ञ के रूप में प्रतिनियुक्त किया गया था। प्रो. जगतराम ने 1994 में पीजीआई में एक्स्ट्रा कैप्सुलर मोतियाबिंद सर्जरी की पुरानी तकनीक की जगह फेकमूल्सीफिकेशन की तकनीक पेश की। प्रो. जगतराम ने 40 वर्षों में लगभग एक लाख नेत्र रोगियों का सफल इलाज किया है।