सिटी ब्यूटीफुल में बिक रहे दूध में पोषक तत्वों को बढ़ाने वाले पदार्थों की काफी कमी पाई गई है। यह कमी पानी व अन्य द्रव्यों के मिलाने से आती है। ट्राइसिटी के लिए गए दूध के 90 में से 69 सैंपल मिलावटी पाए गए हैं।
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इसमें तबेले से आने वाला और पैकेट दूध दोनों ही शामिल हैं। यह खुलासा पीयू और पीजीआई की एक रिसर्च में सामने आया है। स्टडी के मुताबिक दूध की शक्ति बढ़ाने में फैट, सालिड नॉट फैट और टोटल सालिड नाम के पोषक तत्वों का अहम रोल होता है।
फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड एक्ट (एफएसएसए) 2006 ने इसके लिए एक स्टैंडर्ड बनाया हुआ है। उसके मुताबिक तीनों का अनुपात जब तय मानक के मुताबिक होगा तो दूध की पौष्टिकता बरकरार रहेगी।
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अनुपात इधर-उधर हो तो मिलावट का अंदेशा
यदि अनुपात थोड़ा भी इधर से उधर होता है तो मिलावट का अंदेशा बढ़ जाता है। जांच में इसी बात का खुलासा हुआ है। दूध के तीनों ही अहम पोषक तत्व तय मानक से काफी कम पाए गए हैं।
स्टडी में हिस्सा लेने वाले विशेषज्ञ बताते हैं कि रेगुल्टरी अथॉरिटी को सख्ती से कच्चे दूध की क्वालिटी को चेक करना होगा। एक्ट के मुताबिक ऐसे दूध संचालकों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करनी चाहिए।
स्टडी का मकसद ग्राहकों के बीच अवेयरनेस फैलानी थी। अच्छी बात यह रही कि दूध में स्टार्च, मिल्क पाउडर, यूरिया, शुगर, कास्टिक सोडा, सोडियम हाइड्रो-आक्साइड जैसे पदार्थ नहीं मिले। स्टडी में पीयू की डाक्टर सोनिका राज, श्रुति गुप्ता, पीजीआई के सोनू गोयल और अमरजीत सिंह शामिल हैं।
तीनों शहरों से 30-30 सैंपल लिए
स्टडी करने वाली टीम ने तीनों ही शहरों से 30-30 सैंपल कलेक्ट किए। इसमें 75 सैंपल डेली घर-घर दूध देने वाले संचालकों और 15 सैंपल विभिन्न दूध कंपनियों के आने वाले पैकेट से लिए गए। ये सैंपल उन संचालकों से लिए गए, जो सुबह छह बजे से लेकर दस बजे तक दूध देने जाते हैं। लगातार नौ दिन तक दूध संचालकों को रोक-रोक कर सैंपल लिए। इन सैंपलों को फूड एंड हेल्थ लेबोरेटरी चंडीगढ़ में भेजा गया। 21 सैंपलों में पोषक तत्वों का अनुपात बिल्कुल ठीक मिला है।
पंचकूला-मोहाली से बेहतर है चंडीगढ़ का मिल्क तीनों शहरों के अलग-अलग सैंपलों की जांच में सामने आया है कि पंचकूला और मोहाली के कच्चे दूध में पानी की मात्रा ज्यादा पाई गई है, जबकि फैट, सालिड नॉट फेट और टोटल सालिड कंटेंट की काफी कमी मिली है। यानी इन दोनों इलाकों में दूधिया अंधाधुंध मिलावट कर रहे हैं। प्रशासन की ओर से कोई भी जांच नहीं की जा रही है। दोनों शहरों के मुकाबले चंडीगढ़ के कच्चे दूध की क्वालिटी बेहतर है।
यह स्टडी बताती है कि चंडीगढ़ में दूध की क्वालिटी कैसी है। इससे एक बात यह भी निकलकर आई है कि मिलावटी दूध बेचने वालों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। एक्ट के मुताबिक ऐसे संचालकों के खिलाफ सजा और जुर्माना का प्रावधान है। अमरजीत सिंह, प्रोफेसर, कम्युनिटी मेडिसिन पीजीआई
टेबल दो पोषक तत्व----------चंडीगढ़------पंचकूला-----मोहाली फैट------------------5.4---------4.39--------4.39 सालिड नॉट फैट-------8.47--------7.69--------7.44 टोटल सालिड--------13.87--------11.69------11.83
टेबल नंबर तीन पोषक तत्व--------कंपनी का दूध-----तबेले का दूध फैट-----------------5.42-------------4.62 सालिड नाट फेट------8.45---------------7 टोटल सालिड-------13.87------------12.14