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पीजी किराया बना सिरदर्द... तीन माह से घर पर बैठे छात्रों पर संचालक बना रहे देने का दबाव

Sat, 23 May 2020 12:29 PM IST
पंचकुला ब्‍यूरो अमर उजाला, चंडीगढ़
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सांकेतिक तस्वीर
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सरकारी व निजी शिक्षण संस्थानों में शिक्षा पा रहे विद्यार्थियों के लिए पीजी का किराया सिरदर्द बन गया है। तीन माह से वह अपने घरों पर हैं और संचालक उनसे किराया जमा करने के लिए दबाव बना रहे हैं। इससे उनमें तनाव लगातार बढ़ रहा है। परिवारों के पास किराया जमा करने के लिए पैसे नहीं हैं। अब छात्र संगठन सामने आए हैं। उन्होंने अफसरों से मांग की है कि पीजी में रह रहे विद्यार्थियों का किराया माफ किया जाए, ताकि छात्रों की समस्याएं कम हो सकें।
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ट्राइसिटी में सरकारी व निजी शिक्षण संस्थानों की संख्या 110 से अधिक है। इसके अलावा कोचिंग सेंटरों की संख्या भी 70 से अधिक है। इनमें विद्यार्थियों की संख्या लगभग 1.50 लाख है। यह विद्यार्थी हॉस्टल व पीजी में रहते हैं। हॉस्टलों की सीटों की संख्या कम है। इसमें 60 फीसदी विद्यार्थी पीजी में रहते हैं। पीजी की संख्या भी तीन हजार के पार है।

लॉकडाउन से पहले यह विद्यार्थी हर माह अपना किराया दे रहे थे लेकिन कोरोना के कारण लॉकडाउन लगा और विद्यार्थी अपने घरों को चले गए। लगभग तीन माह से विद्यार्थी अपने घरों पर हैं। अब पीजी संचालक छात्रों को फोन कर रहे हैं। किराया जमा करने का दबाव बना रहे हैं। इससे छात्रों का तनाव बढ़ रहा है। वह अपनी प्रतियोगी व अन्य परीक्षाओं की तैयारी नहीं कर पा रहे हैं।
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छात्र संगठन नेताओं को फोन कर बताईं दिक्कत
छात्रों ने छात्र संगठनों के नेताओं को फोन करके दिक्कतें बताईं। एबीवीपी के अध्यक्ष हरीश गुर्जर ने कहा कि तमाम छात्रों ने मेल व फोन के जरिये अवगत कराया है कि पीजी संचालक उन पर किराया जमा करने का दबाव बना रहे हैं। इससे उनकी समस्या बढ़ रही हैं। परिवारों की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं है। लॉकडाउन में परिवारों ने काम नहीं किया है।

उन्होंने कहा कि एबीवीपी के छात्र नेताओं ने नगर निगम के अधिकारियों को पत्र दिया है। किराया माफ करने की मांग की है। एनएसयूआई के अध्यक्ष निखिल नरमेटा ने कहा कि छात्रों की यह समस्या बढ़ गई है। हमने पहले भी किराया माफ करने की मांग की थी। अब फिर से अधिकारियों को पत्र भेज रहे हैं। पीजी में रह रहे छात्रों की समस्या हल होनी चाहिए।
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