केंद्रीय फूड प्रोसेसिंग मंत्री हरसिमरत कौर बादल समेत पंजाब से एनडीए के सभी छह सांसदों के चुनाव को पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में अलग-अलग याचिका दायर कर उनकी सदस्यता रद्द करने की मांग की गई है।
इन सांसदों पर वोट के लिए सिख धर्म के इस्तेमाल और चुनाव अधिकारियों को चुनाव खर्च का गलत ब्योरा देने का आरोप लगाया गया है। अभी ये याचिकाएं दायर की गई हैं और बेंच के समक्ष सुनवाई के लिए आने में समय लग सकता है।
इन्होंने डाली याचिकाएं
हरसिमरत बादल के खिलाफ नवजोत सिंह ने, रणजीत सिंह ब्रहमपुरा के खिलाफ कांग्रेसी उम्मीदवार हरमिंदर सिंह गिल ने, शेर सिंह गुबाया के खिलाफ वोटर भूपिंदर सिंह ने, प्रेम सिंह चंदूमाजरा के खिलाफ एडवोकेट हरभाग सिंह ने, विनोद खन्ना के खिलाफ नीरज सल्होत्रा और विजय सांपला के खिलाफ इंदरपाल सिंह ने।
विज्ञापन में सिख धर्म के इस्तेमाल का आरोप
सभी याचिकाओं में प्रमुख रूप से आरोप लगाया गया है कि शिअद-भाजपा ने विभिन्न चैनलों पर चुनाव प्रचार के लिए जारी विज्ञापन में सिख धर्म का इस्तेमाल किया।
विज्ञापन के शीर्षक नहीं रीसां, नहीं रीसां, नहीं रीसां पंजाब दीआं में हरमंदर साहिब, गुरुग्रंथ साहिब का प्रकाश दिखाया गया है और साथ में नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल एवं शिअद अध्यक्ष सुखबीर की तस्वीरों का इस्तेमाल किया गया।
इसके अलावा ‘करे कम्म लोक भलाई दे अकाली-बीजेपी सरकार’ शीर्षक के विज्ञापनों में हरमंदर साहिब, गत्तका और सिख धर्म के प्रतीक निशान साहिब केअलावा राष्ट्रीय ध्वज का इस्तेमाल किया गया।
गलत चुनाव खर्च बताने का आरोप
आरोप लगाया गया है कि ऐसे विज्ञापनों का प्रसारण विशेषकर पीटीसी चैनल पर दिन में कई बार प्रकाशित हुआ और वह भी सात अप्रैल से 28 अप्रैल तक लगातार। इस चैनल पर एकतरफा प्रचार हुआ और कांग्रेसी उम्मीदवारों को तरजीह तक नहीं दी गई।
नरेंद्र मोदी की रैलियों में हुए खर्च को विजयी उम्मीदवारों ने अपने चुनाव खर्च में काफी कम बताया है। याचिकाओं में आरोप लगाया गया है कि शिअद-भाजपा उम्मीदवारों ने चुनाव जीतने के लिए धर्म का सहारा लिया और चुनाव खर्च के गलत शपथ पत्र देकर नियमों का उल्लंघन किया, लिहाजा इनका चुनाव रद्द किया जाए और सदस्यता खत्म की जानी चाहिए।