न हो अनावश्यक तौर पर क्रूर व्यवहार
हाईकोर्ट ने कहा कि जेल/सुधारात्मक सुविधाएं आपराधिक न्याय प्रणाली का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं और यह अपराधियों के सुधार व पुनर्वास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। मानवता का मूल सिद्धांत यह है कि प्रत्येक व्यक्ति सम्मान के साथ व्यवहार का हकदार है। कैदियों के साथ अनावश्यक रूप से क्रूर या अपमानजनक व्यवहार नहीं किया जाना चाहिए और अनुच्छेद 21 के तहत उनके बुनियादी मानवाधिकारों को बरकरार रखा जाना चाहिए। कैदियों को पर्याप्त बाहरी गतिविधियों तक पहुंच की अनुमति देना अनिवार्य है, क्योंकि ऐसे प्रावधानों की अनुपस्थिति से तनाव बढ़ सकता है, हिंसा की घटनाएं बढ़ सकती हैं और कैदियों की भलाई के लिए जोखिम पैदा हो सकता है।
नेल्सन मंडेला की लाइनों का आदेश में जिक्र
हाईकोर्ट ने अपने आदेश की शुरुआत करते हुए नेल्सन मंडेला की लाइनों को दर्ज किया। इनके अनुसार, ऐसा कहा जाता है कि कोई भी किसी देश को तब तक सही मायने में नहीं जानता जब तक वह उसकी जेलों के अंदर न हो। किसी राष्ट्र का मूल्यांकन इस आधार पर नहीं किया जाना चाहिए कि वह अपने सर्वोच्च नागरिकों के साथ कैसा व्यवहार करता है, बल्कि अपने निम्नतम नागरिकों के साथ कैसा व्यवहार करता है।