नागरिकता संशोधन बिल को लेकर देश में राजनीतिक घमासान मचा हुआ है। सरकार जहां इस बिल के हक में है, वहीं विपक्ष पक्ष के लोग इसका पुरजोर विरोध कर रहे हैं। मगर बाहरी देशों से आकर हिंदुस्तान में आकर अलग अलग इलाकों में बसे लोग इस बिल का स्वागत कर रहे हैं। इन लोगों का कहना है कि यह दिन किसी दिवाली से कम नहीं है। जो लोग इसका विरोध कर रहे हैं, वह विरोध न करें बल्कि इस बिल को पूरी तरह से समझें और बाहर से आकर बसे लोगों की भावनाओं की कद्र करें।
लुधियाना के कुंदनपुरी इलाके में आकर बसे शम्मी सिंह और अमकीर सिंह ने बताया कि वह अफगानिकस्तान के काबुल इलाके में रहते थे। वह 2012 में हिंदुस्तान आए थे और लुधियाना के कुंदनपुरी इलाके में बसे थे। शम्मी सिंह और अमरीक सिंह बताते हैं कि वह काबुल में कपड़े का कारोबार करते थे।
काबुल में अल्पसंख्यक लोगों के साथ काफी धक्केशाही होती थी। उनके परिवारों पर काफी दबाव बनाया जाता था। महिलाएं भी पूरी तरह से सुरक्षित नहीं थी। उनके परिवारों को तंग किया जाता था और धर्म परिवर्तन का भी दबाव बनाया जाता था। उन्होंने परिवार को बचाने के लिए अफगानिस्तान को छोड़ने का फैसला कर दिया। परिवार को वहां से लेकर वह पहले पाकिस्तान गए और वहां से होते हुए भारत में आ गए। यहां वह लुधियाना के कुंदनपुरी इलाके में बस गए।
अब उनका कारोबार अच्छा चल रहा है और परिवार भी पूरी तरह से सुरक्षित है। अब उन्हें यहां कोई डर नहीं है। दोनों परिवारों को सदस्यों ने कहा कि यह बिल उनकी दिवाली से कम नहीं है। वह काफी खुश है कि उन्हें भारत में नागरिकता मिल जाएगी। वह सरकार का धन्यवाद करते हैं और विरोध करने वालों से प्रार्थना करते हैं कि वह दूसरे देशों से आकर बसे लोगों की भावनाओं को समझें।