फैमिली पेंशन के लिए विधवा को 12 साल धक्के खिलाए, हाईकोर्ट ने ठोका एक लाख का जुर्माना
देरी से जारी फैमिली पेंशन पर छह प्रतिशत ब्याज देने का हाईकोर्ट ने दिया आदेश
एचवीपीएनएल और डीएचवीबीएन को जुर्माने की राशि का बराबर हिस्से में करना होगा भुगतान
चंडीगढ़। विधवा को फैमिली पेंशन के लिए 12 साल तक धक्के खिलाने पर कड़ा रुख अपनाते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम (डीएचवीबीएन) व हरियाणा विद्युत प्रसारण निगम लिमिटेेड (एचवीपीएनएल) पर एक लाख रुपये जुर्माना लगाया है। दोनों को राशि मिल कर भुगतान करने का आदेश देते हुए हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि पेंशन राज्य का दान नहीं बल्कि कर्तव्य है।
याचिका दाखिल करते हुए सुजाता मेहता ने बताया कि उसके पति हरियाणा स्टेट इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड में सर्किल सुपरिंटेंडेंट थे। वह 30 जून 1999 को रिटायर हो गए थे। इसके बाद 19 मई 2008 को उनकी मौत हो गई थी। याची ने इसके बाद 2010 में फैमिली पेंशन के लिए डीएचवीबीएन को आवेदन दिया था। इसके बाद याची को कहा गया कि एचवीपीएनएल में आवेदन किया जाए। 2019 में याची ने फिर से डीएचवीबीएन में आवेदन किया और इस आवेदन को विभाग ने एचवीपीएनएल को भेज दिया। 2020 में याची को एरियर के साथ फैमिली पेंशन का भुगतान किया गया। याची ने इस राशि पर ब्याज देने की मांग की थी।
इस मांग का विरोध करते हुए डीएचवीबीएन ने कहा कि 1999 में हरियाणा स्टेट इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड को चार हिस्सों में बांट दिया गया था। इससे पहले रिटायर होने वाले कर्मियों के मामले एचवीपीएनएल देखता है। ऐसे में याची को कहा गया था कि एचवीपीएनएल को फैमिली पेंशन के लिए आवेदन दे, लेकिन उसने ऐसा नहीं किया। हाईकोर्ट ने कहा कि 1999 में आपने उनका आवेदन एचवीपीएनएल को भेजा था, यही कार्य 2010 में भी किया जा सकता था। असंवेदनशील रवैए के कारण याची को 12 साल फैमिली पेंशन का इंतजार करना पड़ा। हाईकोर्ट ने याची को एरियर पर ब्याज का हकदार मानते हुए छह प्रतिशत की दर से भुगतान करने का आदेश दिया है। साथ ही याची को हुई परेशानी के लिए एचवीपीएनएल व डीएचवीबीएन पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया है।