मरीजों को सस्ती दवाएं उपलब्ध कराने के लिए संचालित जन औषधि केंद्रों की स्थिति दयनीय है। ऐसे में मरीज जेनेरिक दवा की उम्मीद में अस्पतालों और जन औषधि केंद्रों का चक्कर काटने को मजबूर हैं। सेक्टर 16 स्थित गवर्नमेंट मल्टी स्पेशिएलिटी हॉस्पिटल का जन औषधि केंद्र टेंडर समाप्त होने पर अक्टूबर में बंद कर दिया गया था। दोबारा टेंडर की प्रक्रिया पूरी होने पर 20 नवंबर को केंद्र फिर से खुल तो गया, लेकिन वहां आने वाले मरीज अब भी खाली हाथ ही लौट रहे हैं।
कारण, योजना के तहत 500 तरह की दवाओं की उपलब्धता का दावा करने वाले इस केंद्र पर चंद दवाओं का उपलब्ध होना है। 20 नवंबर से अब तक चार बार 150 तरह की दवाओं की मांग भेजी जा चुकी है, लेकिन हर बार कुछ गिनी-चुनी दवाएं भेजकर किनारा कर लिया जा रहा है। जानकारी के अनुसार जिस कंपनी को दवाओं की आपूर्ति का जिम्मा दिया गया है उसके पास स्टॉक ही नहीं है।
जीएमएसएच की ओपीडी में दिखाने आए मोहाली के नरेश ठाकुर ने बताया कि जन औषधि केंद्र पर बीपी की भी दवा उपलब्ध नहीं है। जन औषधि केंद्र के नाम पर जनता को बस सस्ती दवा का सपना दिखाया जा रहा है। सेक्टर 8 की रेनू कालिया का कहना है कि केंद्र पर पहले सेनेटरी पैड सस्ते दर पर मिल जाते थे, लेकिन अब उसकी आपूर्ति भी महीनों से बंद है।
जीएमसीएच की दुकान के खुलने पर लगा प्रश्नचिह्न
जीएमसीएच सेक्टर 32 स्थित जन औषधि केंद्र को एसडीएम सौरभ मिश्रा ने 25 सितंबर को खाली कराया था। इसका कारण दुकान का टेंडर समाप्त होना था। इसके लिए प्रशासन की ओर से दोबारा टेंडर भी जारी किया जा चुका है, लेकिन अब तक दुकान को दोबारा अलॉट करने की कार्रवाई नहीं की जा रही है। सौरभ मिश्रा का कहना है कि पीपी एक्ट के तहत दुकान खाली कराई गई थी। आगे क्या कार्रवाई करनी है इसका फैसला प्रशासन ही लेगा।
इसलिए सस्ती होती हैं जेनेरिक दवाएं
जेनेरिक दवाएं सीधे खरीदार तक पहुंचती हैं। इन दवाओं की मार्केटिंग के लिए अलग से बजट खर्च नहीं होता। सरकार इन दवाओं की कीमत खुद तय करती है, इसलिए ये दवाएं ब्रांडेड दवाओं की तुलना में सस्ती होती हैं। जेनेरिक दवाओं का असर ब्रांडेड दवाओं की ही तरह होता है। योजना के तहत खोले गए इन केंद्रों को सरकार की ओर से दो लाख रुपये तक की वित्तीय मदद की जाती है। इसके साथ ही जन औषधि केंद्र को 12 महीने की बिक्री का 10 प्रतिशत अतिरिक्त इंसेटिव दिया जा रहा है।
जन औषधि केंद्र के संचालन में अस्पताल प्रशासन के स्तर पर कोई हस्तक्षेप नहीं किया जाता। दवाओं की आपूर्ति सरकार द्वारा तय की गई कंपनी और दुकान के टेंडर की प्रक्रिया प्रशासन स्तर पर पूरी होती है।
- डॉ. वीके नागपाल, मेडिकल सुपरिंटेंडेंट, जीएमएसएच