हरियाणा की धरती से बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान की शुरुआत करने वाली भाजपा सरकार को पुरस्कार वितरण मामले में बेटियों से भेदभाव पर जमकर आलोचना झेलनी पड़ी।
महिला प्रतिभागियों के अलावा विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि भाजपा भले ही बेटियों को प्रोत्साहित करने की बात करे, पर मैराथॉन पुरस्कार में महिला प्रतिभागियों से भेदभाव सरकार की कथनी-करनी में अंतर जाहिर कर रहा है।
सेक्टर तीन के ताऊ देवीलाल स्पोर्ट्स कांप्लेक्स में रविवार को आयोजित हॉफ मैराथॉन में यह आरोप लगे। मैराथॉन के आयोजक खुद भाजपा जिला अध्यक्ष विशाल सेठ थे। वह हरियाणा मार्स्ट्स एथलेटिक्स एसोसिएशन के अध्यक्ष की हैसियत से राज्यपाल की मेजबानी करते नजर आए।
इस बीच सवाल उठा कि पुरुष वर्ग में प्रथम स्थान पाने वाले को 51 हजार की राशि दी गई तो महिलाओं में प्रथम विजेता को 21 हजार रुपये क्यों दिए गए।
नागपुर से आईं एथलीट रोहिणी ने कहा कि यहां आई तो उन्हें बताया गया कि महिला वर्ग के लिए पुरस्कार राशि 51 हजार ही है, पर जब पुरस्कार वितरण की बारी आई तो पुरस्कार 21 हजार दिए जाने पर वह हैरान रह गई।
सीनियर सिटीजन भी उपेक्षित
हरियाणा मार्स्ट्स एथलेटिक्स एसोसिएशन की ओर से सेकंड पंचकूला हेल्थ अवेयरनेस रन-2015 पर आयोजित हैलथोन कार्यक्रम से सीनियर सिटीजन ने भी उपेक्षित महसूस किया। इस आयुवर्ग के पुरुष वर्ग की पुरस्कार राशि भी कम है। वहीं, धावकों के लिए पर्याप्त सुविधाएं भी नहीं थी।
दो सौ रुपये फीस ली थमाई चॉकलेट
इस दौड़ में पांच साल के बच्चों से लेकर 70 साल तक के बुजुर्गों ने हिस्सा लिया। एसोसिएशन ने सब प्रतिभागियों से एंट्री फीस के तौर पर दो सौ रुपये लिए थे। इवेंट में देशभर से पहुंचे प्रतिभागियों का आरोप है कि उन्हें कोई प्रमाण-पत्र भी नहीं दिया गया। बच्चों को चॉकलेट जरूर थमा दी गई।
बेटियों के लिए अधिक होनी चाहिए थी राशि
इनेलो जिला अध्यक्ष मनोज अग्रवाल ने कहा कि भाजपा सरकार महिलाओं के उत्थान और समानता की बात करती है। ऐसे में हॉफ मैराथॉन में पुरुषों की तुलना में महिलाओं की पुरस्कार राशि अधिक होनी चाहिए। यहां तो महिलाओं के साथ भेदभाव किया गया।
वहीं, हरियाणा प्रदेश महिला कांग्रेस की जनरल सेक्रेटरी रंजीता मेहता के अनुसार, सरकार बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ के लिए प्रोत्साहित कर रही है। ऐसे में मैराथॉन में बेटा-बेटी में भेदभाव क्यों बरता गया।
इनके बहाने भी सुन लें
हॉफ मैराथॉन के विजेताओं को पुरस्कार राशि देने की व्यवस्था मेरे नियंत्रण में नहीं थी। इसकी जिम्मेदारी संगठन के जनरल सेक्रेटरी निभा रहे थे।
-विशाल सेठ, भाजपा जिला अध्यक्ष और मार्स्ट्स एथलेटिक्स एसोसिएशन के प्रधान।
हमारे पास फंड की कमी थी, इसलिए महिलाओं की संख्या देखते हुए पुरस्कार राशि कम रखी गई।
-आरके शर्मा, सेक्रेटरी, मास्टर्स एथेटिक्स एसोसिएशन।