चंडीगढ़। शहर में पार्किंग घोटाला करने वाली कंपनी पाश्चात्य एंटरटेनमेंट प्राइवेट लिमिटेड को फर्जी बैंक गारंटी मुहैया कराने के मामले में चंडीगढ़ पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने दिल्ली के बैंक ऑफिसर रवि चंद्र प्रकाश को गिरफ्तार किया है। आरोपी को पुलिस मंगलवार अदालत में पेश करेगी। आरोपी रवि चंद्र प्रकाश आजमगढ़ (यूपी) का रहने वाला है और केनरा बैंक में बैंक ऑफिसर है। पुलिस की तरफ से बताया गया है कि जांच में पता लगा कि रवि चंद्र प्रकाश ने ही पाश्चात्य कंपनी को फर्जी बैंक गारंटी जारी की जो बैंक के सिस्टम में मौजूद नहीं है। बता दें कि पुलिस पार्किंग का ठेका लेने वाली पाश्चात्य कंपनी के निदेशक संजय शर्मा को पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है। संजय शर्मा की गिरफ्तारी 7 मार्च को ही हुई थी और वर्तमान में वह न्यायिक हिरासत में है। मामले में पुलिस को एक अन्य आरोपी अनिल शर्मा की तलाश है। इस मामले की जांच आर्थिक अपराध शाखा कर रही है। पुलिस के रडार पर बैंक के साथ नगर निगम के कई कर्मचारी और अधिकारी भी हैं।
बता दें कि नगर निगम का कंपनी पर करीब सात करोड़ रुपये बकाया है, जो उसने नहीं चुकाया। इसके अलावा 2020 में पार्किंग टेंडर लेने के दौरान 1.67 करोड़ रुपये की फर्जी बैंक गारंटियां जमा करवाने का आरोप है क्योंकि निगम ने कंपनी द्वारा दिए बैंक गारंटी से जब अपने पैसे वसूल करने चाहे तो पता चला कि कंपनी ने जो बैंक गारंटी दी थी, वो फर्जी है। यह जानकारी नगर निगम को 18 फरवरी को हुई थी जिसके बाद नगर निगम ने चंडीगढ़ के एसएसपी को पत्र लिखकर कंपनी के खिलाफ केस दर्ज करने की मांग की थी। पुलिस ने केस दर्ज कर जांच के लिए आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) को केस सौंप दिया था। पुलिस के ईओडब्ल्यू के पास यह केस 6 मार्च को पहुंचा, जिसके आधार पर केस दर्ज कर जांच शुरू की गई।
पाश्चात्य कंपनी को 2020 में मिला था 57 पार्किंगों का ठेका
नगर निगम ने वर्ष 2020 में शहर की 89 पार्किंगों को दो जोन में बांटकर उन्हें ठेके पर दिया था। जोन एक की 57 पार्किंगों का ठेका पाश्चात्य एंटरटेनमेंट प्राइवेट लिमिटेड और जोन 2 की 32 पार्किंगों का ठेका रामसुंदर कंपनी को दिया गया था। ठेका मिलने के कुछ दिन बाद ही कोरोना आ गया और लॉकडाउन लग गया। दोनों ठेकेदारों ने लाइसेंस फीस माफ करने के लिए निगम में आवेदन किया। सदन में एजेंडा लाकर उनकी लाइसेंस फीस भी माफ करवाई गई। जोन एक के ठेकेदार को हर माह 45 लाख रुपये निगम को देना था। ठेकेदार ने लगभग डेढ़ साल तक रुपये निगम में जमा करवाए और उसके बाद वह लगातार फीस माफ करने के लिए पत्र लिखता रहा। इस दौरान लाइसेंस फीस, जुर्माना और दोनों का ब्याज मिलाकर लगभग 7 करोड़ रुपये का बकाया हो गया। 23 जनवरी 2023 को कंपनी का ठेका समाप्त हो गया। उसके बाद निगम ने बकाया वसूलने के लिए बैंक को पत्र लिखा, तब बैंक की ओर से बताया गया कि उनकी ओर से बैंक गारंटी का कोई सत्यापन पत्र निगम को नहीं दिया गया है जो निगम के पास बैंक गारंटी है, वो फर्जी है।