चंडीगढ़। सेक्टर-22 स्थित फेडरल बैंक के साथ 18.92 लाख रुपये की धोखाधड़ी के मामले में साइबर क्राइम ने एक गैंग के दो शातिरों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ 5 मार्च 2023 को धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश रचने सहित विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया था। इनकी पहचान करनाल निवासी अमरजीत (31) और हिसार निवासी कुलदीप पन्नू (30) के रूप में हुई है। फेडरल बैंक के मैनेजर अर्पण शर्मा ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि उन्हें किसी अज्ञात नंबर से फोन आया था। आरोपी ने खुद को बैंक का ग्राहक बताया और कहा कि पैसों की आवश्यकता है। वह उन्हें व्हाट्सएप पर सभी जानकारियां दे रहा है जबकि बाकी के कागजात बाद में दे देगा। इसके बाद उन्होंने बैंक के स्टाफ आदित्य वर्मा को वह नंबर देकर बात करने के लिए कहा। आदित्य वर्मा ने नंबर पर फोन किया तो आरोपी ने खुद को राज मक्कड़ बताया। उसने पैसे ट्रांसफर करने के लिए कहते हुए बैंक खाते से जुड़ी कई जानकारियां सांझा कीं। आरोपी ने व्हाट्सएप पर बैंक के असली ग्राहक राज मक्कड़ की प्रोफाइल फोटो लगा रखी थी। उसने व्हाट्सएप के जरिए बैंक से बात कर अपने बैंक खाते में 18.92 लाख रुपये की राशि जमा करवा ली। आरोपी ने दोबारा बैंक खाते में पैसे ट्रांसफर करवाने के लिए कहा तो बैंक कर्मी को शक हो गया। इस पर बैंक की ओर से असली ग्राहक राजेश मक्कड़ के नंबर पर फोन किया गया। राजेश मक्कड़ ने कहा कि उन्होंने फोन कर किसी को भी पैसे ट्रांसफर करने के लिए नहीं कहा। उन्होंने इसकी शिकायत पुलिस से करने के लिए कहा। इसके बाद आरोपी ने आदित्य वर्मा के साथ व्हाट्सएप पर चैट के साथ प्रोफाइल को भी डिलीट कर दिया।
पुलिस ने ऐसे पकड़े ठग
पुलिस ने जांच के दौरान आरोपियों के नंबर का विवरण लेकर लोकेशन ट्रेस किया तो पता चला दिल्ली एनसीआर की है। इसके बाद पुलिस ने राजेश कक्कड़ के बैंक खाते की जांच की तो इंडसइंड बैंक खाते में 9 लाख 57 हजार और केनरा बैंक में 9 लाख 35 हजार रुपये ट्रांसफर हुए। पुलिस ने बैंक खातों की जांच की तो पाया कि आरोपियों ने पैसे दिल्ली एनसीआर के एटीएम से निकाले और धोखाधड़ी के पैसों से सोना भी खरीदा। इन बैंक खातों में दर्ज मोबाइल नंबर मनीष कुमार, राजाराम मीणा, सोनू कुमार और अर्जुन सिंह के नाम पर है। पुलिस ने मोबाइल नंबरों की सीडीआर और आईएमआई नंबर की जांच की। आईएमआई नंबर पर कई सिम कार्ड को चलाया गया था। यह सिम मनीष कुमार, राजाराम मीणा, सोनू कुमार और अर्जुन सिंह के नाम पर थे। सभी नंबर की लोकेशन हरियाणा के अंसध, दिल्ली एनसीआर की आई। पुलिस ने हरियाणा के असंध और दिल्ली एनसीआर में छापेमारी की। पुलिस ने अमरजीत सिंह और कुलदीप पन्नू को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने दोनों आरोपियों को जिला अदालत में पेश कर रिमांड लिया है।
ऐसे करते थे ठगी
पुलिस जांच में पता चला कि आरोपी दोपहिया और चारपहिया वाहनों की एजेंसी की जानकारी गूगल के जरिए जुटाते थे। आरोपी एजेंसियों के मैनेजर और एमडी से एजेंसियों के बैंक खाते और चेक की जानकारी लेते थे। इसके बाद आरोपी धोखाधड़ी करने के लिए चेक में हेरफेर करते थे। जिस बैंक का चेक होता था, उसी ब्रांच में आरोपी व्हाट्सएप के जरिए चेक की फोटो भेजने के बाद फोन कर इमरजेंसी में खाते में पैसे ट्रांसफर करने के लिए कहते थे। बैंक एजेंसी की रेपुटेशन देखते हुए खाते में पैसे ट्रांसफर कर देती थी। पुलिस ने आरोपियों से एक थार, सोने की चार अंगूठी, दो चेन, सोने के दो सिक्के, पांच लाख रुपये नकद, चार मोबाइल फोन बरामद किए हैं।
पूछताछ में हुआ ये खुलासा
आरोपियों ने पूछताछ में बताया कि वह ठगी के दो अन्य मामलों में भी शामिल थे। उनके खिलाफ साइबर लोन फ्रॉड का एक मामला राजस्थान में दर्ज है और दूसरा मामला उत्तरप्रदेश के सहारनपुर में दर्ज है। उस मामले में एक पीड़िता ने कर्ज को लेकर आत्महत्या भी कर ली थी। इन दोनों मामलों में आरोपी जमानत पर हैं। जमानत मिलने के बाद आरोपियों ने अगस्त 2022 में एक गैंग बनाया। इस गैंग में पंकज, आशीष, अंकुर जिंदल और रवि शामिल थे। आरोपियों ने पूछताछ में बताया कि वह फेडरल बैंक के अलावा आईसीआईसीआई बैंक, यस बैंक, एचडीएफसी बैंक, एक्सिस बैंक, बैंक ऑफ बड़ोदा सहित अन्य बैंकों से दो करोड़ रुपये के करीब की ठगी कर चुके हैं।