फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Parkash Singh Badal: हिंदू-सिख भाईचारे के प्रतीक थे प्रकाश सिंह बादल, 'बाबा बोहड़' की मिली थी पहचान

Tue, 25 Apr 2023 10:24 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जालंधर (पंजाब)

सार

प्रकाश सिंह बादल का जन्म 8 दिसंबर 1927 को पंजाब में मुक्तसर के गांव अबुल खुराना में हुआ था। उनके पिता का नाम रघुराज सिंह और मां का नाम सुंदरी कौर था। 1959 में उन्होंने सुरिंदर कौर से शादी की थी।
विज्ञापन
प्रकाश सिंह बादल व सुखबीर सिंह बादल। - फोटो : फाइल
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

लंबे समय तक भाजपा के साथ गठबंधन करने वाले प्रकाश सिंह बादल हिंदू-सिख भाईचारे के प्रतीक भी थे। 1996 में भाजपा और अकाली दल करीब आए और 1997 के विधानसभा चुनाव में पहली बार गठबंधन कर चुनाव लड़े। इसका सियासी फायदा दोनों ही दलों को मिला। भाजपा की पंजाब में सियासी आधार बढ़ाने के लिए जमीन मिली तो बादल को सत्ता की कमान। 1997 में बादल ने राज्य के 28वें मुख्यमंत्री के तौर पर कार्यभार संभाला और उन्होंने 2007 चौथी बार और 2012 में पांचवीं बार मुख्यमंत्री की कुर्सी संभाली। प्रकाश सिंह बादल कहते थे कि हिंदू और सिखों में नाखुन और मांस का रिश्ता है। प्रकाश सिंह बादल 1996 से 2008 तक अकाली दल के अध्यक्ष भी रहे थे। पंजाब की राजनीति में प्रकाश सिंह बादल को बाबा बोहड़ (दिग्गज) कहा जाता था। 

विज्ञापन


बादल के साये में कायम रही भाईचारे की छांव
80 के दशक के शुरुआती समय में ही जरनैल सिंह भिंडरांवाले और उसके समर्थक हिंदुओं को निशाना बनाने लगे थे। इस दौरान भिंडरांवाले की विचारधारा के मुखर आलोचक रहे अखबार के मालिक लाला जगत नारायण की हत्या कर दी थी। पंजाब के काले दौर में आतंकवादियों ने 20 हजार हिंदुओं और सिखों को मौत के घाट उतारा। साल 1984 में प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद पंजाब का माहौल और बिगड़ गया और 1995 तक जारी रहा। 

1987 में आतंकवादियों ने हरियाणा में बस पर हमला करके 34 हिंदुओं और पंजाब में भी बस पर हमला करके 38 हिंदुओं की हत्या कर दी। हिंदू व सिखों के बीच गहरी खाई बनती जा रही थी। हिंदुओं और सिखों के बीच ऐसी खाई बनने लगी कि कई हिंदू वहां से पलायन करने पर मजबूर हो गए। ये हिंदू वो थे, जिन्होंने सिखों के साथ ही देश के विभाजन का दंश झेला था।  पंजाब में दो दशकों से अधिक समय तक उग्रवाद के बाद अकाली दल ने 1997 के विधानसभा चुनाव में हिंदू-सिख भाईचारे के मुद्दे पर भाजपा के साथ हाथ मिला लिया और इसकी पहल प्रकाश सिंह बादल ने की थी। उन्होंने इसे नाखून व मांस का रिश्ता बताया था।

विज्ञापन
विज्ञापन

मोरारजी सरकार में ढाई महीने तक कृषि मंत्री रहे
साल 1977 में केंद्र की मोरारजी देसाई की सरकार में वह करीब ढाई महीने तक कृषि और किसान कल्याण मंत्री भी रहे। बादल ने पहली बार 1970 में राज्य के 15वें मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ली। इसके बाद 1977 में वे राज्य के 19वें मुख्यमंत्री बने। 20 साल के बाद फिर उन्हें सत्ता की कमान ली लेकिन इस बार बीजेपी के साथ गठबंधन करने का सियासी फल मिला था। यानी पंजाब में आतंकवाद के खात्मे के बाद 1997 में वह भाजपा अकाली दल गठबंधन की तरफ से पंजाब के मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठे थे।

2011 में हुआ पत्नी का निधन
प्रकाश सिंह बादल का जन्म 8 दिसंबर 1927 को पंजाब में मुक्तसर के गांव अबुल खुराना में हुआ था। उनके पिता का नाम रघुराज सिंह और मां का नाम सुंदरी कौर था। 1959 में उन्होंने सुरिंदर कौर से शादी की। बेटी परनीत की शादी आदेश प्रताप सिंह कैरों से हुई, जो कि पंजाब के पूर्व सीएम प्रताप सिंह कैरों के बेटे हैं। वहीं, बादल की पत्नी सुरिंदर कौर का 2011 में लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया था। वह उनकी राजनीतिक सलाहकार व रीढ़ की हड्डी मानी जाती थी। बेटा सुखबीर सिंह बादल शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष हैं। 
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें