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हद है! चंडीगढ़ में 1600 पार्क, बच्चों के खेलने के लिए एक भी नहीं

Sat, 25 Jun 2016 06:30 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़।
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पार्क - फोटो : demo
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शहर में 1600 छोटे बड़े पार्क हैं जिन पर नगर निगम हर माह करोड़ों रुपये खर्च करता है। लेकिन बच्चों के खेलने के लिए रिहायशी इलाके में एक  भी पार्क एवं ग्राउंड नगर निगम की ओर से विकसित नहीं किया गया है।
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बच्चों को उनका हक नगर निगम और प्रशासन क्यों नहीं दे रहा, उनके लिए अबूझ पहले बना हुआ है।  बच्चे जब किसी पार्क में खेलते हैं तो सीनियर सिटीजन और आसपास के निवासी अपने घर के शीशों और पार्क में लगे पौधों का हवाला देते हुए उन्हें रोकते हैं। ऐसे में कई बार तो विकसित पार्क में बच्चों के खेलने के मामले पुलिस थाने तक पहुंच चुके हैं।

बच्चों का कहना है कि खेलना उनका हक है, ऐसे में नगर निगम और  प्रशासन उनकी ओर से क्यों ध्यान नहीं दे रहा है। अभिभावक बच्चों के शारीरिक विकास की चिंता में हैं क्योंकि बच्चे घरों में मनोरंजन के नाम पर टीवी, कंप्यूटर और मोबाइल गेम्स से चिपके रहते हैं। शहर की ग्रीन बेल्ट्स और पार्क में झूले लगे भी हैं तो वे केवल छह साल के बच्चों के लिए ही हैं। सात साल से लेकर 20 तक के बच्चों के लिए किसी भी पार्क में कोई सुविधा नहीं है। ऐसे में बच्चे फुटबाल, बास्केट बाल, किक्रेट जैसे गेम नहीं खेल पा रहे हैं।
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सदन में उठा मामला, पर रिजल्ट नदारद
डेढ़ साल पहले सदन की बैठक में भी बच्चों के लिए खेलने की कोई जगह तय न होने का मामला जोर शोर से उठा था। उसमे निर्णय हुआ था कि प्रशासन इसके लिए एक पालिसी बनाए और वार्ड के पार्षद जिन पार्कों को खेलने के स्थल में बदलना चाहते हैं, नगर निगम उसकी मंजूरी के लिए प्रस्ताव को प्रशासन के वास्तुकार के पास भेजेगा। परंतु शहर में एक भी पार्क को खेलने के स्थल में तबदील नहीं किया गया है।

वित सचिव के आदेश फिर भी आधे स्कूल गेट नहीं खुलते
प्रशासन की ओर से शहर के चार स्कूलों में स्पोर्ट्स कार्नर बनाए जा रहे हैं। जबकि वित्त सचिव ने तीन माह पहले यह आदेश दिया था कि शहर के सभी सरकारी स्कूलों के ग्राउंड रिहायशी इलाके में रहने वाले बच्चों के खेलने के लिए खोले जाएंगे, लेकिन हकीकत यह है कि आधे सरकारी स्कूलों के गेट शाम को नहीं खुलते हैं। कई स्कूलों के चौकीदार गेट नहीं खोलते हैं, जबकि कुछ स्कूल की खिड़कियों के शीशे टूटने का हवाला देते हुए नहीं खोलते हैं।
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हर सेक्टर में कम से कम एक खेलने के लिए ग्राउंड बने

पार्क में सुविधा - फोटो : demo pics
हर सेक्टर में कम से कम एक खेलने के लिए ग्राउंड बनाया जाना चाहिए। पूर्व कमिश्नर वीपी सिंह ने हर सब सेक्टर में एक खेलने का मैदान बनाने का आश्वासन दिया था लेकिन कोई भी ग्राउंड नहीं बना। नगर निगम सिर्फ कागजों में ही काम कर रहा है।
बलजिंदर बिट्टू, चेयरमैन, फासवेक

प्रशासन ने सरकारी स्कूलों के ग्राउंड शाम को बच्चों के लिए खोलने के आदेश जारी किए हैं लेकिन प्रशासन को निजी स्कूलों के गेट भी खुले रखने के निर्देश जारी करने चाहिए क्योकि प्रशासन ने निजी स्कूलों को नोमिनल रेट पर ही जमीन अलाट की है। 
नितिन गोयल, अध्यक्ष, चंडीगढ़ पेरेंट्स एसोसिएशन


भूल जाएं कि भविष्य में कपिल देव, योगराज, युवराज जैसे खिलाड़ी शहर से निकलेंगे। खेलने के लिए कोई जगह तय न होने से अब बचपन के खेल (कबड्डी और गुल्ली डंडा) भी दिखनी बंद हो गई है। मैं कई बार इंडोर स्पोटर्स कांप्लेक्स की मांग कर चुका हूं। बच्चों का शारीरिक विकास रूक गया है।
सौरभ जोशी, भाजपा पार्षद

सरकारी स्कूल रिहायशी इलाकों से दूर हैं, ऐसे में अगर सेक्टर में ही बच्चों के लिए प्ले ग्राउंड मिल जाए तो अच्छा है। इससे खेल प्रतियोगिताओं में भी इजाफा होगा और युवक भी नशे से दूर रहेंगे।
अंकित अरोड़ा, चंडीगढ़ यूथ एसोसिएशन, मनीमाजरा

बच्चे अगर पार्कों में खेलते है तो उन्हें रोका जाता है। उनका कहना है कि शहर में इतने पार्क की जरूरत नहीं है। नगर निगम हर माह पार्क के रखरखाव पर खर्चा करता है लेकिन खेल को बढ़ावा देने के लिए कुछ नहीं करता है। वह जल्द ही बच्चों को प्ले ग्राउंड दिलवाने के लिए अभियान छेडेंगे
हरमेल केसरी, अध्यक्ष, युवा कांग्रेस

बच्चों को हर खेल खेलने के लिए जगह मिलनी चाहिए। उनकी अपील पर ही तीन माह पहले वित सचिव ने सभी सरकारी स्कूलों के गेट शाम को खेलने के लिए ओपन करने के आदेश जारी किए थे उनका कहना है कि कम से कम हर सब सेक्टर में एक पार्क खेलने के लिए तय किया जाए इसके लिए वह प्रशासन से पालिसी बनाने की मांग जल्द रखेंगे।

मेयर, अरुण सूद
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