उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार के पहले फैसले में से चार बातों को स्वीकार करते हुए स्कूलों को पूरी ट्यूशन फीस और दाखिला फीस लेने की अनुमति दी है। सालाना फंड और ट्रांसपोर्टेशन का लॉकडाउन के दौरान जितना खर्च हुआ है, वह लेने के लिए कहा है। लेकिन फेडरेशन ने अभिभावकों को राहत देने का फैसला किया है, जिसके तहत सालाना फंड, ट्यूशन फीस और परिवहन शुल्क कम से कम लिया जाएगा।
उन्होंने कहा कि यह भी सच है कि काफी अभिभावकों की आमदनी हाल के महीनों में प्रभावित हुई है लेकिन बहुत से अभिभावकों के कारोबार ऐसे हैं जो इस लॉकडाउन के दौरान प्रभावित नहीं हुए हैं। ऐसे हालात में सरकार और अन्य सियासी पार्टियों ने स्कूलों के मुद्दे पर सियासी रोटियां सेंकनी शुरू कर दी हैं और अभिभावकों को गुमराह किया है।
इस कारण आज पांच लाख परिवार जोकि प्राइवेट संस्थाओं में नौकरी कर रहे हैं, के लिए भूखों मरने की नौबत आ गई है। वहीं, सरकार ऐसे हालात में अभिभावकों को फीसों के लिए या स्कूलों को वेतन अदायगी के लिए कोई मदद नहीं कर रही। इसी कारण से स्कूलों को अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ा। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट ने अभिभावकों और स्कूल मुलाजिमों के हित में फैसला दिया है।