पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड में कुछ समय पहले करोड़ों रुपये की लागत से किताबें छापने के लिए खरीदे गए कागज का मामला संदेह के घेरे में आया गया। अब इस मामले की विजिलेंस द्वारा जांच की जाएगी। पंजाब सरकार ने इस संबंध में विजिलेंस को जांच के आदेश दिए है। अगर इसमें कोई कमी सामने आती है तो विजिलेंस द्वारा संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
जानकारी के मुताबिक, इस संबंध में एडवोकेट एचसी अरोड़ा ने पंजाब सरकार के चीफ सेक्रेटरी को पत्र लिखा था। इसमें उन्होंने आरोप लगाया था बोर्ड ने विभिन्न विषयों की किताबें छापने के लिए 2013 में कागज खरीदा था। उनका आरोप था कि इससे बोर्ड को करीब साढ़े छह करोड़ का नुकसान हुआ है।
उन्होंने अपने पत्र में लिखा है कि बोर्ड ने पेपर सप्लायर से 54300 रुपये मीट्रिक टन के हिसाब से पेपर खरीदा था। जबकि पेपर खरीदने का मंजूर रेट 42355 रुपये है। इस हिसाब से बोर्ड को 6.50 करोड़ का नुकसान हुआ है। जबकि बोर्ड की आय का मुख्य स्त्रोत बच्चों की फीस व किताबों की बिक्री से होने वाली आय है।
ऐसे में बोर्ड ने बच्चों के पैसे को बर्बाद किए है। इसके बाद चीफ सेक्रेटरी ने विजिलेंस ब्यूरो को मामले की सारी जांच करने के आदेश दिए, ताकि मामले की सच्चाई को सामने लाया जा सकें। वहीं, बोर्ड की चेयरपर्सन तेजिंदर कौर धालीवाल ने बताया कि पेपर खरीदने के लिए हाई पावर कमेटी गठित की गई थी। जिसमें कई विभागों के अधिकारी शामिल थे। वहीं, ई टेंडर के माध्यम से पेपर खरीदा गया है।