फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

चंडीगढ़ में नए नियम लागू: अब शादी कराने वाले पंडित और मौलवी को रखना होगा जोड़े व गवाहों का ब्योरा, उल्लंघन पर कार्रवाई होगी

Mon, 31 Jan 2022 08:47 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

चंडीगढ़ प्रशासन ने सोमवार को धार्मिक स्थलों पर होने वाली शादी के बारे में नई मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी की है। अब धर्मगुरुओं को वैवाहिक जोड़े व गवाहों का ब्योरा अपने पास रखना होगा।
विज्ञापन
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

चंडीगढ़ प्रशासन ने शहर के सभी धार्मिक संस्थानों (मंदिर, गुरुद्वारा, मस्जिद, चर्च) पर होने वाली शादी के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी कर दिया है। प्रशासन के आदेश के अनुसार सभी धार्मिक संस्थानों को किसी जोड़े की शादी करवाते समय अब इस एसओपी का पालन करना होगा।

विज्ञापन


एसओपी के अनुसार धार्मिक संस्थान द्वारा विवाह संपन्न कराने से पहले यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि लड़का और लड़का दोनों कानून के अनुसार विवाह की आयु के लिए योग्य हैं। शादी कराने के लिए लड़का और लड़की को किसी भी तरह से परेशान नहीं किया जाएगा। धार्मिक संस्थान विवाह के लिए जोड़ों को माता-पिता की सहमति लेने के लिए बाध्य नहीं होंगे। 

विवाह संपन्न कराने के लिए जोड़ों से मोटी रकम नहीं वसूली जाएगी। धार्मिक संस्थानों द्वारा संपन्न विवाह में दोनों पार्टियों के रिश्तेदार, दोस्तों व परिचितों में से 18 वर्ष और उससे अधिक आयु के कम से कम दो गवाहों शामिल होना आवश्यक है। संस्थानों को विवाह संस्कार से पहले जोड़े और गवाहों की जानकारी भी प्राप्त करनी होगी। जिसमें लड़का और लड़की का नाम, पिता का नाम, माता का नाम, जन्मतिथि, आवासीय पता, मोबाइल नंबर, आधार संख्या, धर्म, विवाह के समय वैवाहिक स्थिति आदि की जानकारी एकत्रित करनी होगी। इसके अलावा गवाह का नाम, पिता का नाम, आयु, दंपत्ति से संबंध, आवासीय पता और मोबाइल नंबर भी लेना होगा।
विज्ञापन


धार्मिक संस्थान द्वारा जारी किया जाएगा प्रमाण पत्र
धार्मिक संस्थानों को जन्म प्रमाण (आयु प्रमाण), जोड़े के घर का पता और आईडी प्रूफ प्राप्त करना होगा व प्राप्त जानकारी और दस्तावेजों का उचित रिकॉर्ड बनाए रखना चाहिए। संस्थान में होने वाले विवाहों का एक उचित रिकॉर्ड व रजिस्टर मेंटेन करना जरूरी है। शादी को संपन्न करने वाले पुजारी द्वारा धार्मिक संस्थान से एक प्रमाण पत्र जारी किया जाएगा, जिसमें नाम, पिता का नाम, जन्मतिथि, आवासीय पता, राष्ट्रीयता, धर्म, विवाह के समय वैवाहिक स्थिति जैसे जोड़े का पूरा विवरण, गवाहों के नाम, जोड़े के हस्ताक्षर और गवाह और जोड़े की तस्वीर आदि शामिल होगी। संस्थानों द्वारा बनाया गया रिकॉर्ड जरुरत पड़ने पर वेरिफिकेशन के लिए किसी भी न्यायालय, प्रशासनिक अथॉरिटी या पुलिस विभाग के अधिकारियों के समक्ष उपलब्ध करवाना होगा। अगर किसी भी संस्थान द्वारा इन आदेश का उल्लंघन किया गया तो प्रशासन उचित कार्रवाई करेगा।

विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें