हरियाणा पुलिस कर्तव्य और प्रतिज्ञा का निर्वाह कैसे करती है, यह दरोगा की मर्जी से तय होता है। फिर चाहे थानों के बाहर लिखे नियम हों या कर्तव्यों और प्रतिज्ञा को दरकिनार कर दिया जाए।
बता दें कि दो फरवरी 2016 को सेक्टर-15 स्थित एक मकान के ताले तोड़कर आठ लाख रुपये के आभूषण चोरी हो गए थे। इस वारदात की जांच में जो लापरवाही हुई है, वह पुलिस की प्रतिज्ञा पर ठोकर मारने जैसा है।
दरअसल, हरियाणा पुलिस महानिदेशक के निर्देशानुसार प्रदेश के तमाम पुलिस थानों में वारदात के बाद एक पुलिस जांच अधिकारी के क्या कर्तव्य होते हैं, इसके लिए बाकायदा होर्डिंग्स लगाए गए हैं। पुलिस थानों में लटके होर्डिंग्स में जांच अधिकारी के 20 कर्तव्य और उसकी प्रतिज्ञा का जिक्र मोटे-मोटे अक्षरों में किया गया है।
अगर जांच अधिकारी अपने कर्तव्यों और प्रतिज्ञा से भटकते हैं तो जागरूक नागरिक इसकी शिकायत पुलिस के उच्च अधिकारियों से कर सकते हैं। फिलहाल दो फरवरी को सेक्टर-15 में हुई वारदात के बाद जांच में बरती गई लापरवाही की शिकायत पुलिस महानिदेशक को भेजी जा रही है।
क्योंकि वारदात के बाद मौके पर संबंधित पुलिस चौकी के प्रभारी प्रदीप कुमार और संबंधित थाना सेक्टर-14 के प्रभारी सुखबीर सिंह भी पहुंचे थे। लेकिन इस वारदात के बावजूद छानबीन के दौरान पुलिस ने डॉग स्क्वाएड को नहीं बुलाया। इतना ही नहीं पुलिस को शिकायत किए एक सप्ताह बीत गया। लेकिन पुलिस ने अभी तक आसपास के घरों में लगे सीसीटीवी की फुटेज तक नहीं ली है।
इस तरह विभाग का नाम ऊंचा कर रही पुलिस
पुलिस थाने में जांच अधिकारी की प्रतिज्ञा और उसके 20 कर्तव्यों में सातवें नंबर पर साफ तौर से लिखा है कि ‘क्या मैंने डॉग स्क्वाएड, एफएसएल टीम और फिंगर प्रिंट टीम को सूचना दी है।’ छठे नंबर पर लिखा है कि ‘क्या मेरे अनुसंधान से मुद्दई संतुष्ट है।’ वहीं पांचवें नंबर पर लिखा है कि ‘क्या मैंने घटनास्थल पर पूरा समय लगाया और तमाम सबूत इकट्ठे किए।’ वहीं 20 नियमों के साथ अंत में लिखा है कि ‘मैं अनुसंधान अधिकारी हूं और प्रतिज्ञा करता हूं उपरोक्त नियमों को निभाकर दिखाऊंगा और अपने विभाग का नाम ऊंचा करूंगा।’
डॉग स्क्वाएड बुलाना तो औपचारिकता है : जांच अधिकारी
सेक्टर-15 पुलिस चौकी के प्रभारी एवं जांच अधिकारी प्रदीप कुमार से जब इस बारे में जानकारी ली गई गई तो उन्होंने वारदात की जांच के लिए डॉग स्क्वाएड को न बुलाने की वजह पर अटपटा जवाब दिया।
बता दें कि डॉग स्क्वाएड की टीमें कई बड़ी वारदातों को सुलझाने में मदद कर चुकी हैं। यहां तक कि आतंकी हमलों की जांच में डॉग स्क्वाएड काफी मददगार साबित होते हैं। लेकिन जांच अधिकारी का कहना है कि डॉग स्क्वाएड को बुलाना सिर्फ औपचारिकता होती है। इसलिए डॉग स्क्वाएड को नहीं बुलाया गया। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि वारदात की अभी तक वीडियो फुटेज नहीं हासिल की गई है।
पूर्व जस्टिस के घर में हुई थी चोरी
सेक्टर-15 स्थित कोठी नंबर 1948 में दो फरवरी को जिस वारदात की एफआईआर सेक्टर-14 थाने में दर्ज है। वह एफआईआर पूर्व जस्टिस के बेटे ने दर्ज कराई है। हालांकि मामला जिला पुलिस के उच्च अधिकारियों के संज्ञान में भी लाया गया। बावजूद इसके निचले स्तर पर जांच में हुई लापरवाही इशारा करती है कि आम आदमी की शिकायत को किस तरह इन थानों में दबाया जाता होगा।
जांच के आदेश दिए हैं : डीसीपी
डीसीपी अनिल धवन के मुताबिक उन्होंने इस मामले की जांच के लिए अधिकारियों को आदेश दिए हैं। धवन ने बताया कि जांच में लापरवाही हुई है, यह मामला उनके संज्ञान में अभी आया है। वह इसकी जांच कराएंगे। उन्होंने कहा कि जिले में अपराधियों पर अंकुश लगाने के लिए पुलिस पूरी तरह प्रयासरत है।