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यहां चतुर्थ श्रेणी कर्मियों के भरोसे चल रहा अस्पताल

Mon, 04 Jan 2016 02:33 PM IST
अतुल वर्मा/अमर उजाला, पंचकूला
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जानकार हैरानी होगी कि पंचकूला में सेक्टर 6 स्थित सिविल अस्पताल दो साल से चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के भरोसे चल रहा है। एक ओर प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री यह बयान दे रहे हैं कि लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देने के लिए स्टाफ की भर्तियां की जाएंगी। वहीं दूसरी ओर कॉन्ट्रैक्ट पर चल रहे कर्मचारियों को ही हटाया जा रहा है।
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पंचकूला सेक्टर-6 स्थित सिविल अस्पताल से पिछले करीब दो साल से कॉन्ट्रैक्ट पर चल रहे लैब कंप्यूटर ऑपरेटर्स, फार्मासिस्ट, ऑपरेशन टेक्नीशियन और ईसीजी टेक्नीशियन सहित 22 कच्चे कर्मचारियों की छुट्टी कर दी गई है। इन सभी की जगह नियमित स्टाफ की नियुक्ति नहीं की गई है। बल्कि क्लास फोर्थ के कर्मचारियों से काम लिया जा रहा है।

स्कीम बंद होने का दिया हवाला
निकाले गए कच्चे कर्मचारियों के मुताबिक उन्हें अस्पताल प्रशासन की ओर से मुख्यमंत्री मुफ्त इलाज योजना (एमएमआईवाई) स्कीम बंद होने का हवाला देकर निकाला गया है। बीते 15 दिसंबर को उन्हें नोटिस जारी किया गया था और नए साल से पहले ही 31 तारीख को उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया गया।
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एमएमआईवाई स्कीम के तहत हुई थी नियुक्ति
जानकारी के मुताबिक जून 2014 को मुख्यमंत्री मुफ्त इलाज योजना (एमएमआईवाई) स्कीम के तहत इन कंप्यूटर ऑपरेटर्स, फार्मासिस्ट, ऑपरेशन टेक्नीशियन और ईसीजी टेक्नीशियन की टेस्ट और दस्तावेज जांच के बाद नियुक्ति की गई थी।

बिना विकल्प के हटाए कच्चे कर्मचारी
बता दें कि लैब कंप्यूटर ऑपरेटर्स, फार्मासिस्ट, ऑपरेशन टेक्नीशियन और ईसीजी टेक्नीशियन को अस्पताल प्रशासन द्वारा बिना विकल्प के चलते कर दिया गया है। इन कच्चे कर्मचारियों को हटाने से पहले न तो भर्तियों को लेकर कोई विज्ञापन जारी किया गया और न ही नए स्टाफ की नियुक्ति की गई।

अस्पताल का काम हो सकता है प्रभावित
कॉन्ट्रैक्ट पर चल रहे इन कच्चे कर्मचारियों को निकाले जाने के बाद से अस्पताल का काम प्रभावित हो रहा है। आंकड़ों पर ध्यान दें तो लैब में रोजाना करीब 250 मरीज टेस्ट के लिए आते हैं। वहीं फार्मासिस्ट की जगह भी क्लास फोर्थ के कर्मचारी जैसे-तैसे परस्क्रिप्शन पढ़कर दवा दे रहे हैं। ऐसे में गलतियों की गुंजाइश कहीं न कहीं बढ़ सकती है।

क्या हुआ तेरा वादा?
ध्यान रहे कि अस्पताल में एचआईएमएस के उद्घाटन के दौरान लैब के कच्चे कंप्यूटर ऑपरेटर्स ने स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज को लिखित में मांग पत्र सौंपा था और जल्द नियमित किए जाने की मांग की थी। इतना ही नहीं स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने लैब कंप्यूटर ऑपरेटर्स को आश्वासन भी दिया था।

पीएमओ डॉ. वीना सिंह से सीधी बात
कॉन्ट्रेक्ट पर चल रहे 22 कर्मचारियों को क्यों हटाया गया।
पीएमओ: आईपीएचएस स्कीम बंद होने की वजह से इन्हें हटाया गया है। लेकिन इस संबंध में मुख्यमंत्री कार्यालय में फाइल भेजी है। फाइल जल्द अप्रूव होकर आएगी। जिसके बाद ये सभी कच्चे कर्मचारी कंटीन्यू करेंगे।
एमएमआईवाई स्कीम क्यों बंद की गई।
पीएमओ: कोई और दूसरी स्कीम नहीं थी। जिसके तहत इन कच्चे कर्मचारियों को लिया जाता। अब चीफ सेक्रेटरी के ऑर्डर के तहत ही इन कच्चे कर्मचारियों को वापस रखा जाएगा।
अभी इनकी जगह पर क्लास फोर्थ कर्मचारियों से काम लिया जा रहा है, ऐसा क्यों।
पीएमओ: अब लैब में जो कंप्यूटर ऑपरेटर बैठा है, आप उसे क्लास फोर्थ कैसे कह सकते हैं। देखिए! अस्पताल चलाना ही है। इसके लिए चारों ओर से कोशिश की जा रही है, ताकि मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं दी जा सकें।
नियमित भर्तियां होने तक इन कच्चे कर्मचारियों का कॉन्ट्रैक्ट बढ़ाया नहीं जा सकता था।
पीएमओ: ऐसी कोई स्कीम थी ही नहीं। कितना अच्छा होता अगर कोई स्कीम बंद ही न होती और ये कर्मचारी भी न हटकर कंटीन्यू करते।
लैब कंप्यूटर ऑपरेटर्स और फार्मासिस्ट की जगह क्लास फोर्थ कर्मचारी काम कर रहे हैं। ये कहां तक ठीक है।
पीएमओ: देखिए, ऐसा कुछ नहीं है। अभी इस स्थिति से निपटने के लिए वैल क्वालीफाइड कंप्यूटर ऑपरेटर्स और अन्य कर्मचारियों को लगा रखा है। सभी अस्पताल में बेहतर सेवा देने के लिए लगे रहते हैं। जल्द ही किसी दूसरी स्कीम के तहत हटाए गए कच्चे कर्मचारियों को लगाया जाएगा।
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