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हरियाणा में जल्द पंचायत चुनाव नहीं: याची ने अर्जी पर जवाब दाखिल करने की मोहलत मांगी, सुनवाई एक सप्ताह टली

Mon, 21 Mar 2022 06:02 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

गुरुग्राम के प्रवीण चौहान व अन्य ने 15 अप्रैल 2021 को हरियाणा पंचायती राज अधिनियम 2020 में किए गए संशोधन को भेदभावपूर्ण और असंवैधानिक बताते हुए चुनौती दी थी।
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पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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पंचायत चुनाव में आरक्षण के प्रावधान में विसंगतियों को लेकर दाखिल याचिका पर एक बार फिर से सोमवार को सुनवाई टाल दी गई। सरकार द्वारा चुनाव करवाने के लिए दाखिल की गई अर्जी पर सोमवार को  फिर से याची पक्ष ने जवाब के लिए मोहलत मांगी जिस पर हाईकोर्ट ने एक सप्ताह का समय याची पक्ष को दिया है। ऐसे में एक बार फिर से पंचायत चुनाव लटक गया है।

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हाईकोर्ट में सरकार पहले कह चुकी थी कि निकट भविष्य में चुनाव नहीं होंगे। इसके बाद सरकार ने जल्द चुनाव की अनुमति के लिए अर्जी दाखिल की थी। हाईकोर्ट ने इस अर्जी पर सरकार को राहत राहत नहीं दी और याची को इस पर जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है। ऐसे में इस अर्जी पर बिना हाईकोर्ट की अनुमति के चुनाव संभव नहीं है।

हाईकोर्ट में अर्जी दाखिल करते हुए हरियाणा सरकार ने कहा था कि प्रदेश में पंचायतों का कार्यकाल 23 फरवरी को समाप्त हो चुका है। पंचायती राज अधिनियम के दूसरे संशोधन के कुछ प्रावधान को हाईकोर्ट में चुनौती देते हुए याचिका दाखिल की गई थी। सरकार ने कहा कि बीते दिनों कोरोना के प्रकोप के बीच सरकार ने चुनाव न करवाने का निर्णय लिया था। 

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सरकार ने अर्जी में कहा कि अब स्थिति बेहतर हो गई है इसलिए चुनाव करवाए जा सकते हैं। सरकार दो फेज में चुनाव करवाना चाहती है। पहले फेज में ग्राम पंचायत और दूसरे फेज में पंचायत समीति और जिला परिषद के चुनाव का प्रस्ताव है। सरकार ने कहा कि पहले उनकी ओर से कोर्ट में कहा गया था कि निकट भविष्य में सरकार चुनाव नहीं करवाएगी। ऐसे में अब चुनाव करवाने के लिए न्यायालय की अनुमति आवश्यक है। सरकार की इस अर्जी पर याचिककर्ता के जवाब के इंतजार में पंचायत चुनाव लटक रहा है।  

यह है मामला
गुरुग्राम के प्रवीण चौहान व अन्य ने 15 अप्रैल 2021 को हरियाणा पंचायती राज अधिनियम 2020 में किए गए संशोधन को भेदभावपूर्ण और असंवैधानिक बताते हुए चुनौती दी थी। कोर्ट को बताया गया कि अधिनियम में संशोधन कर अब सीटों का 8 प्रतिशत बीसी-ए श्रेणी के लिए आरक्षित करना अनिवार्य है और न्यूनतम 2 सीटों का आरक्षण अनिवार्य है। 

हरियाणा में 8 प्रतिशत के अनुसार केवल छह जिले हैं जहां 2 सीटें आरक्षण के लिए बचती हैं। 18 जिलों में केवल 1 सीट आरक्षित की जानी है जबकि सरकार नए प्रावधानों के अनुसार न्यूनतम 2 सीटें अनिवार्य हैं। हाईकोर्ट ने सरकार से कहा था कि वह चाहे तो आरक्षण के नए प्राविधान को निलंबित कर पुराने नियमों के तहत चुनाव करवा सकती है। खंडपीठ ने कहा कि सरकार ने अंडरटेकिंग दी है कि जब तक याचिका पर फैसला नहीं होता तब तक सरकार निकट भविष्य में चुनाव नहीं करवा रही है। कोर्ट ने सरकार को अंडरटेकिंग पर रुख स्पष्ट करने या पुराने नियमों के तहत चुनाव करवाने का आदेश दिया था।
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