सालों से पाकिस्तान के रास्ते जा रहे पंजाब के गंदे पानी को पड़ोसी देश ने रोक दिया है। पाकिस्तान की ओर से सीमावर्ती क्षेत्र में एक बड़ा बांध बनाया गया है, इससे राज्य के 5 जिलों का नालों के जरिए जाने वाला पानी रुक गया है। इससे सीमावर्ती 20 किमी क्षेत्रफल में तेजी से जलभराव शुरू हो गया है। इस दूषित जल से पंजाब के कई गांवों की खेतीबाड़ी और पेयजल पर संकट खड़ा हो गया है। पर्यावरणविद् संत बलबीर सिंह सीचेवाल ने इस पर जताई चिंता और सरकार को रिपोर्ट भेजने की बात कही है।
सालों से पंजाब के 5 जिलों मलोट, फिरोजपुर, मोगा, फरीदकोट और मुक्तसर का गंदा पानी 22 नालों से एकत्र होकर पाकिस्तान क्षेत्र में सतलुज दरिया में जाकर मिल जाता है। अब पाकिस्तान ने एक बड़ा बांध बना दिया है, जिसके कारण यह गंदा पानी सतलुज तक नहीं पहुंच पा रहा है। नतीजन सीमा पर लगभग 20 किमी के क्षेत्रफल में यह दूषित पानी भरना शुरू हो गया है। इससे अब सूबे के जमशेर मुहार, काबुल शाह, सुरेशवाला, आवा, नूर मोहम्मद, गुहरामी, मुबाका सहित 15 से अधिक गांवों की हजारों हेक्टेयर खेती प्रभावित होने लगी है। ग्रामीण इस समस्या को लेकर खासे परेशान हैं।
फेल हो रहे पानी के सैंपल
दूषित जल और गंदगी के कारण अब 20 किलोमीटर से अधिक क्षेत्र में पेयजल भी दूषित हो गया है। प्रयोगशालाओं में जांच में पुष्टि हो चुकी है कि यहां का भूमिगत जल अब पीने योग्य नहीं रहा। यदि जल्द ही इस समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया गया तो हालात और भी खराब हो जाएंगे।
सीचेवाल मॉडल है स्थायी समाधान
संत बलबीर सिंह सीचेवाल ने गांवों के दौरे के बाद बताया कि सीचेवाल मॉडल ही इसका उपाय है। दूषित जल को नालों में डालने के बजाय जिलों के बाहर सीटीपी लगाकर संशोधित किया जाए। यह पानी सिंचाई की समस्या के साथ ही खाद का भी काम करेगा। इससे ग्रामीणों को आर्थिक लाभ भी होगा।
यह बहुत गंभीर समस्या है। कई साल से इस क्षेत्र की यह समस्या बनी हुई है। हमने प्रभावित क्षेत्र का हाल ही में दौरा किया है। ग्रामीणों से भी मुलाकात हुई है। इसको लेकर एक रिपोर्ट तैयार की जा रही है। सरकार को इसके स्थायी समाधान के लिए सीचेवाल मॉडल का सुझाव दिया गया है।
- संत बलबीर सिंह सीचेवाल, सदस्य, पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, एनजीटी