चंडीगढ़। पाकिस्तान में 26/11 और आतंकवाद पर दिए अपने बयान पर मशहूर लेखक व गीतकार जावेद अख्तर ने कहा कि पाकिस्तानी नेताओं और सेना की पॉलिसी पूरे पाकिस्तान की सोच नहीं है। यह सबूत है क्योंकि पाकिस्तान में 3000 लोगों से भरे हॉल में जब मैंने अपनी बात कही तो खूब तालियां बजीं। जावेद अख्तर रविवार को चंडीगढ़ सेक्टर-25 स्थित चितकारा स्कूल में आयोजित लिट फेस्ट में पहुंचे थे। यहां उनकी किताब ‘मेरा पैगाम मोहब्बत है’ पर लेखिका निरुपमा दत्त के साथ एक चर्चा का आयोजन किया गया। इस दौरान उन्होंने डायरेक्टर बनने के सपने से लेखक बनने तक के सफर, शोले समेत मशहूर फिल्मों के डायलॉग लिखने के पीछे की कहानी बताई। उन्होंने पंजाब के साथ अपने रिश्तों और पंजाबी व उर्दू भाषा के रिश्ते के बारे में भी बात की। लोगों ने कई सवाल पूछे और जावेद अख्तर ने लोगों की फरमाइश पर अपनी कई नज्में भी पढ़ीं।
जावेद अख्तर ने कहा कि वह वर्षों से चंडीगढ़ नहीं आ रहे थे लेकिन पिछले कुछ दिनों में दो-तीन बाद चंडीगढ़ आ गए हैं। कहा कि यहां के लोग बड़े गर्मजोशी से स्वागत करते हैं। चंडीगढ़ और पंजाब बेहद खूबसूरत हैं। चर्चा के दौरान भाषाओं में हो रहे बदलाव को लेकर भी सवाल पूछा गया, जिस पर उन्होंने कहा कि जब तक किसी भी भाषा का व्याकरण सुरक्षित रहेगा, भाषा भी सुरक्षित रहेगी।
ऐसा सवाल पूछा, जिस पर चुप नहीं रह सकता था
जावेद अख्तर ने कहा कि भारत और पाकिस्तान का सांस्कृतिक जुड़ाव बहुत गहरा और मजबूत है। उर्दू में लिखने वाले गालिब दिल्ली के थे, मीर लखनऊ के थे। फैज लाहौर में थे तो क्या उन्हें नहीं पढ़ना चाहिए। वहां के सियासतदान क्या करते हैं यह सबको पता है लेकिन पाकिस्तान की ज्यादातर आवाम भारत से अच्छे संबंध चाहती है। भारत के लोग चाहते हैं कि उन्हें इस्लामाबाद जाना या लाहौर जाना हो तो आराम से आ-जा सकें। पाकिस्तानी लोग चाहते हैं कि दिल्ली और लुधियाना आ-जा सकें। करोड़ों लोगों के दिलों में दोस्ती की तमन्ना है। वहां जाने पर मैंने ये चीज महसूस की। फैज फेस्टिवल में अपने बयान पर उन्होंने कहा कि हॉल के अंदर किसी ने ऐसा सवाल पूछा जिस पर मैं चुप नहीं रह सकता था। इसलिए वह सब कुछ कहा लेकिन कमाल की बात है कि वहां के लोगों ने ताली बजाईं।
कॉलेज में दोस्तों के लिए खूब लव लेटर लिखे, लिखने की आदत वहीं से लगी
जावेद अख्तर ने अपने लिखने के सफर के बारे में बताया। कहा कि उन्हें शुरू से ही नॉवेल पढ़ने और फिल्में देखने का शौक था। उन्होंने शुरू में कुछ फिल्म निर्देशकों के साथ बतौर असिस्टेंट काम किया। कई बार ऐसा होता था कि लेखक जो सीन लिखकर देता था वह निर्देशक को पसंद नहीं आता था। कई बार उन्हें उस सीन को बदलने और डायलॉग लिखने का मौका मिला, जो निर्देशकों को धीरे-धीरे पसंद आने लगा। इस तरह जिस फिल्म में वह असिस्टेंट होते उस फिल्म में उनका डायलॉग जरूर होता। इसके बाद सलीम ने उन्हें मौका दिया। बताया कि उन्होंने कॉलेज में दोस्तों के लिए लव लेटर बहुत लिखे हैं। कॉलेज में उन्हें प्रोफेशनल लव लेटर राइटर कहा जाता था। इससे उन्हें लिखने की आदत लगी। बताया कि वह कृष्णचंद से बहुत प्रभावित हुए हैं। उनकी बातों को उन्होंने कविताओं में इस्तेमाल किया है।
पंजाबियों ने उर्दू क्यों छोड़ी, ये उनकी ही भाषा थी
पंजाबी लेखकों ने उर्दू के साथ कैसा बर्ताव किया, इस सवाल पर जावेद अख्तर ने कहा कि पंजाबियों ने बहुत गलत किया कि उर्दू भाषा छोड़ दी। 70-80 के दशक में पंजाबी लोग उर्दू अखबार पढ़ते थे लेकिन अब उर्दू को मुसलमानों की जुबान मान ली गई है जबकि जुबान धर्म की नहीं क्षेत्र की होती है। उन्होंने कहा कि अगर उर्दू सिर्फ मुसलमानों की जुबान होती तो बांग्लादेश के 10 करोड़ मुसलमान उर्दू क्यों नहीं बोलते। उन्होंने कहा कि उर्दू उन्होंने पढ़नी भी नही हैं, उन्होंने बांग्ला पढ़ी। तमिलनाडु, केरल आदि राज्यों के मुसलमानों की जुबान भी उर्दू नहीं है। उन्होंने कहा कि पंजाबी द्विभाषी थे। पुराने लेखक पंजाबी में भी लिखते थे और उर्दू में भी लेकिन अब के लेखकों ने बड़ी गलती की है।
एक लड़की को देखा तो ऐसा लगा...गाना ऐसे लिखा
जावेद अख्तर ने बताया कि 1942 एक लव स्टोरी फिल्म जब बन रही थी तो एक सीन पर गाना होने को लेकर आरडी बर्मन के साथ उनकी काफी बहस हुई। वह चाहते थे कि फिल्म में एक गाना हो लेकिन फिल्म की पूरी टीम उनके खिलाफ थी। काफी बहस हुई और तय हुआ कि तीन दिन में वह गाना लिखें अगर सबको पसंद आया तो गाना रख लिया जाएगा। तीन दिन बीतने पर आरडी बर्मन ने उन्हें बुलाया। उन्होंने गाना लिखा ही नहीं था, वह भूल गए थे। रास्ते में एक तरकीब सोची और स्टूडियो पहुंचे। वहां पर फिल्म की पूरी टीम मौजूद थी। उनसे गाना मांगा गया तो उन्होंने एक लाइन सुनाई और कहा कि अगर ये लाइन सभी को अच्छी लगेगी तो वह आगे का गाना बताएंगे। वो लाइन थी, एक लड़की को देखा तो ऐसा लगा। लाइन सभी को पसंद आ गई। इसके बाद उन्होंने गाने के पहले अंतरे को वहीं स्टूडियो में बैठकर लिखा और मौके पर ही संगीत तैयार किया गया।