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अकाली दल के लिए संजीवनी बना कालिख पोतने का मुद्दा, बनाई नई रूपरेखा, चढ़ेगा सियासी पारा

Thu, 27 Dec 2018 01:05 PM IST
ajay kumar वरिन्दर राणा, अमर उजाला, लुधियाना (पंजाब)
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धरने पर बैठे अकाली नेता
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बेअदबी के बाद वेंटिलेटर पर चल रहे शिरोमणि अकाली दल के लिए लुधियाना में राजीव गांधी की प्रतिमा पर कालिख पोतने का मुद्दा संजीवनी बन गया है। नगर निगम बिल्डिंग ब्रांच ने इस मामले में आरोपी गुरदीप सिंह गोशा के रिश्तेदार की बिल्डिंग को तोड़कर शिअद को एक और मुद्दा थमा दिया। अब शिअद नेता 1984 के सिख दंगों का मामला फिर खड़ा करने में जुट गए हैं। 

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 सीनियर अकाली नेता बिक्रम मजीठिया ने दोनों यूथ नेताओं की पीठ थपथपा कर साफ कर दिया कि इस मुद्दे पर पूरा अकाली दल उनके साथ खड़ा है। धरने में हर अकाली नेता ने 1984 दंगों पर फोकस रखा। वहीं 1984 दंगा पीड़ितों ने भी इस धरने में शामिल होकर कांग्रेस के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। इससे साफ है कि लोकसभा चुनाव से पहले पंजाब में 84 सिख दंगों का मुद्दा सियासत में नया रंग दे सकता है। वही बुधवार को दिल्ली में भी राजीव गांधी चौक पर सिखों ने कालिख पोत दी। 

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अकाली दल का प्रदर्शन
काबिले जिक्र है कि मंगलवार सुबह सलेमटाबरी के पास लगी राजीव गांधी की प्रतिमा पर शिअद यूथ नेता गुरदीप गोशा और मीतपाल सिंह दुगरी ने कालिख पोत दी थी। इसके बाद पंजाब की सियासत का पारा चढ़ गया। खुद मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने इस मुद्दे पर ट्वीट कर अधिकारियों को कार्रवाई करने के आदेश जारी किए। देर शाम पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ नगर निगम में तैनात जेई की शिकायत पर मामला दर्ज करते गुरदीप गोशा को गिरफ्तार कर लिया।

 बुधवार सुबह निगम बिल्डिंग ब्रांच मुलाजिमों ने भदौड़ हाउस के पास बनी बिल्डिंग को तोड़ दिया। यह बिल्डिंग गुरदीप गोशा के रिश्तेदार की है। निगम अधिकारी खुद मान रहे हैं कि इस बिल्डिंग का नक्शा पास हो चुका है लेकिन बिल्डिंग का निर्माण नियमों के अनुसार नहीं हुआ था, इसलिए कार्रवाई की गई। शहर में अन्य अवैध इमारतों पर कार्रवाई करने के जगह सिर्फ एक बिल्डिंग को टारगेट करने से साफ है कि राजनीतिक रंजिश निकालने के लिए सत्ताधारी अब निगम अफसरों का इस्तेमाल कर रहे हैं। 

पुलिस ने गोशा और मीतपाल के खिलाफ धारा 153ए लगाई है, जो कायदे से लगती नहीं है। राजीव गांधी की प्रतिमा न तो नगर निगम ने लगाई और न किसी अन्य सरकारी विभाग ने। यह धारा तो अपनी पगड़ी से मूर्ति को साफ करने वाले गुरसिमरन मंड के खिलाफ लगनी चाहिए। जिसने दशम गुरु द्वारा दी गई दस्तार की बेअदबी की है। निगम अफसरों को सिर्फ गोशा के रिश्तेदार की अवैध बिल्डिंग दिखी। इन दोनों मामलों को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दायर की जाएगी। - बिक्रम मजीठिया, पूर्व मंत्री 
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