'पद्मावती' को लेकर संजय लीला भंसाली की मुश्किलें और बढ़ गई हैं, क्योंकि मूवी को लेकर अब 24 गांवों की पंचायतों ने बड़ा ऐलान किया है। कहें तो पद्मावती फिल्म के विरोध में अब खाप भी कूद पड़ीं हैं। राजपूत बाहुल्य क्षेत्र की दो बड़ी खाप-धामाण खाप और उद्यान खाप के अंतर्गत आने वाले 24 गांवों की पंचायत ने ऐलान किया है कि वे किसी भी सूरत में पद्मावती फिल्म को नहीं चलने देंगे। इसके लिए जो भी फैसला लेना पड़े, लिया जाएगा।
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पंचायत ने 27 नवंबर को चरखी दादरी में रोष-प्रदर्शन के बाद डीसी को ज्ञापन देने का भी निर्णय लिया है। खरककलां स्थित दादी जाब्दे मंदिर परिसर में शुक्रवार की सुबह 24 गांवों की पंचायत में फिल्म को लेकर लोगों के तीखे तेवर देखने को मिले। वक्ताओं ने दो टूक कहा कि फिल्म को किसी भी सूरत में चलने नहीं दिया जाएगा। इसके लिए जो करना पड़ेगा, पंचायत करेगी। वक्ताओं ने कहा कि फिल्म में इतिहास को तोड़-मरोड़ कर दिखाया गया है। फिल्म में रानी पद्मावती को जैसा दिखाया गया है, वैसी हैं नहीं।
केंद्र और राज्य सरकारों को चाहिए कि इतिहास को गलत तरीके से पेश करने वाले फिल्म निर्माता के खिलाफ कार्रवाई करे और फिल्म को रिलीज होने से रोके। पंचायत की अध्यक्षता कर रहे धामाण खाप के प्रधान ऋषि परमार ने कहा कि फिल्म को लेकर अपनी नाराजगी का इजहार करने के लिए धामाण खाप और उद्यान खाप के बैनर तले लोग 27 तारीख को चरखी दादरी में एकत्र होंगे। यहां रोष-प्रदर्शन के बाद डीसी को ज्ञापन सौंप कर अपनी मांगों से अवगत कराया जाएगा। परमार खाप 84 के प्रदेश महासचिव वेदपाल सिंह परमार ने भी पद्मावती फिल्म का विरोध करते हुए 27 के प्रदर्शन शामिल होने की घोषणा की है।
पंचायत में उद्यान खाप के बाबू सिंह बौद, 32 खाप के प्रधान सतपाल सिंह सांवड़, जिला पार्षद महेंद्र सोनी, पूर्व बीडीसी मेंबर बिट्टू शर्मा, रतन सिंह केलंगा, ओम सिंह, दिनेश सिंह, रामभूल सिंह, पूर्व सरपंच सत्येंद्र परमार, खरक के सरपंच अनिल, सिरसा घोघडा के सरपंच उदय सिंह, ढाणी हरसुख के सरपंच राजेश, रेवाड़ी खेड़ा के सरपंच जयभगवान के अलावा धामाण खाप के सचिव रामकंवार, आजाद सिंह, रघुनाथ सिंह ठेकेदार, ओमपाल फौजी, पूर्व पार्षद ओमपाल सिंह चौबारला, पूर्व पार्षद भूपेंद्र, श्यामपाल रणकोली, हंसराज परमार बौंद कलां, प्रह्लाद सिंह एडवोकेट, सुनील सरपंच आदि ने अपने विचार रखे।
पंचायत में ये गांव हुए शामिल
केलंगा, खरक, खरककलां, रेवाड़ी खेड़ा, सैय, बामला, फूलपुरा, नौरंगाबाद, ढाणी हरसुख, सीसर, सांवड़, बौंद कलां, बौंद खुर्द, रणकोली, सांजरवास, रानीला, सांकरोड, अचीना बास आदि गांवों के खापों के नुमाइंदे मौजूद रहे।