इस रंग बदलती दुनिया में इंसान की कीमत कुछ भी नहीं, निकला न करो तुम सजधज कर इमान की नीयत ठीक नहीं। फिल्म राजकुमार के इस गीत को जैसे ही साईं कृष्णा जुस्ता ने अपने स्वर दिए तो टैगोर थियेटर की ऑडियंस मंत्रमुग्ध हो गई। फरीदाबाद के साईं कृष्णा जुस्ता की आवाज का जादू यहां जबरदस्त चला।
मौका था यादगार ए रफी सोसायटी द्वारा आयोजित मोहम्मद रफी एक्सीलेंस अवार्ड 2018 का। इसमें हरियाणा के स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज, पंचकूला के विधायक ज्ञानचंद गुप्ता और सतपाल गुप्ता भी मौजूद थे। यहां गीतों का कारवां चला तो चलता चला गया। पायल ने तेरे बिन सावन कैसे बीता और दीपांशु रावत ने मान मेरा अहसान अरे नादान गीत सुनाकर सबका दिल जीत लिया।
दो फिल्मो की स्क्रीनिंग भी की गई
अपनी प्रस्तुति देते बाल कलाकार
श्रेया वर्मा ने रातों को चोरी चोरी बोले मेरा कंगना, युवराज सिंह ने ये जो चिलमन है दुश्मन है हमारी, श्रष्टि ने खत लिख दे संवरिया के नाम बाबू, अविरल ने पहले मिले थे सपनो में, हरिका ने जब तक रहे तन में जिया, गौरंग ने राही मनवा दुख की चिंता क्यों सताती है गीत गाया। इसके बाद दिव्यम ने घूंघट नहीं खोलूंगी सैंया तेरे आगे, इशप्रीत सिंह ने चलेंगे साथ मिलकर, अनन्या ने जरा हौले हौले चलो मेरे साजना, यशवर्धन बीर सिह राठौर ने आने से उसके आए बहार गीत गाया।
सीनियर कैटेगरी तिलकराज और अनमोल ने ये दिल तुम बिन कहीं लगता नहीं, श्वेता ने आज सोचा तो आंसू भर आए, विजय शर्मा ने एक हंसी शाम को दिल मेरा खो गया, साईं कृष्णा जुस्ता और पायल ने एक तेरा साथ हमको दो जहां से प्यारा है। इसके बाद दीप्ति विनरे ने ऊंची ऊंची दुनिया की दीवारें सैंया तोड़कर, रोहित कुमार ने न झटको जुल्फ से पानी, जयदीप सिंह एंड रीति मित्तल ने आपने याद दिलाया तो मुझे याद आया।
अनमोल ने दो दिल टूटे, दो दिल हारे गीत गाया। इस कार्यक्रम के दौरान मोहम्मद रफी पर आधारित दो फिल्मो की स्क्रीनिंग भी की गई। इसे आईएस कंग ने तैयार किया था। इसमें मोहम्मद रफी की संगीत की यात्रा को भी दिखाया गया।