करीब 55 परिवारों की 400 जिंदगियां पांच दिनों से यमुना की मझधार में फंसीं हैं। यमुना में बाढ़ आने के बाद से इन लोगों का संपर्क शहर से पूरी तरह से कटा हुआ है। जबकि पिछले 15 दिनों से गांव में बिजली नहीं आ रही है। पानी की भी दिक्कत है।
रास्ते, बिजली के खंभे और गलियां पानी में बह गए हैं। कच्चे घर गिर गए हैं। ग्रामीण कट्टों के तिरपाल अड़ाकर सिर छिपाने को मजबूर हैं। स्कूल बंद होने की वजह से बच्चे घर पर बैठे हैं। बीमार होने पर कोई सहायता नहीं मिल रही है। सरकारी राशन को घर तक लाने के लिए ग्रामीणों को जलस्तर घटने का इंतजार है।
यह हालात हैं यमुना नदी के उस पार बसे हरियाणा के गांव पौबारी के। पांच किमी पानी में पैदल चलकर अमर उजाला की टीम सोमवार को पौबारी गांव पहुंची तो लोगों का दर्द छलक आया। ग्रामीणों ने बताया कि उन्हें हर साल बरसात के मौसम में राशन जुटाकर रखना पड़ता है। इस साल राशन नहीं जुटा पाए। लोगों का ईंधन और अनाज खत्म हो चुका है। सरकार ने केरोसिन तो बंद कर दिया, लेकिन किसी भी परिवार को एलपीजी का कनेक्शन नहीं दिया। ग्रामीण हैंडपंप का पानी पीते हैं। इससे बारिश के दिनों में पेट संबंधी बीमारियों से जूझना पड़ता है।
बाढ़ की चपेट में आए मकान
पांच दिनों से फंसे हैं, लेकिन प्रशासन की ओर से कोई मदद नहीं मिली है। ग्रामीण फूजा, नफीस, फुरकान, मंगता, अगसर, कासिम आदि ने बताया कि उनका गांव उन्हेड़ी ग्राम पंचायत के तहत आता है। उनकी मुसीबत गर्मी हो या बारिश कभी खत्म नहीं होती। बारिश के दौरान नदी का जलस्तर बढ़ने से गांव पानी में डूब जाता है। गांव तक पहुंचने के लिए न सड़क है न ही पुल। मकान क्षतिग्रस्त होने पर सामान ट्रालियों में भरकर रखा है।
स्कूल और मस्जिद की छतें बनीं आसरा
चारों ओर से पानी से घिर जाने से ग्रामीणों की दुनिया गांव के स्कूल और मस्जिद की छत पर सिमट जाती है। यही दो ही जगहें पक्की हैं। बाकी घर कच्चे या झोपड़ीनुमा हैं। बारिश के चार महीने यहां के बाशिंदों को पेट भरने के लिए राशन का जुगाड़ पहले से करना पड़ता है। प्रशासन द्वारा दिए जाने वाले राशन को लेकर घर तक पहुंचना मुमकिन नहीं हो पाता है। ग्रामीणों का कहना है कि गांव तक पहुंचने के लिए सड़क और पुल की मांग वह लंबे समय से कर रहे हैं, लेकिन सुनवाई नहीं हो रही है।
बाढ़ की चपेट में गांव पौबारी
पढ़ाई बंद, इलाज का अभाव
जलस्तर अधिक होने से बच्चे पढ़ाई छोड़ कर घर बैठे हैं। पांचवीं तक के अस्थायी स्कूल में टीचर नहीं आ पाते। सबसे अधिक परेशानी बुजुर्ग और बीमारों को होती है। अस्पताल पहुंचने के लिए नदी का जलस्तर कम होने का इंतजार करना पड़ता है। बहुत जरूरी हुआ तो पांच किमी पानी में पैदल चलकर यूपी के सहारनपुर जाना पड़ता है।
दीये और टॉर्च के सहारे गुजरती है रात
मझधार में बसे इस गांव में रात गुजारने के लिए ग्रामीण टॉर्च का सहारा लेते हैं। पानी की वजह से सोने की हिम्मत नहीं जुटा पाते। बिजली तो पहुंचाई गई है, लेकिन पंद्रह दिन से लाइट नहीं है। थोड़ा सा पानी बढ़ते ही खंभे बह जाते हैं। हालांकि कुछ महीने पहले सोलर स्ट्रीट लाइटें लगाई गई हैं।
कोई रिपोर्ट नहीं मिली : डीसी
पौबारी गांव के हालात के बारे में कोई रिपोर्ट नहीं मिली है। अगर वहां के ग्रामीण फंसे हैं, तो राहत पहुंचाई जाएगी। -गिरीश अरोड़ा, डीसी, यमुनानगर
ओवरब्रिज के लिए राशि मंजूर
यमुना पर ओवरब्रिज के लिए 120 करोड़ रुपये की धनराशि मंजूर करवा दी है। बारिश के बाद काम शुरू होने की उम्मीद है। फौरी तौर पर गांव में राहत पहुंचाई जाएगी। -श्याम सिंह राणा, विधायक, रादौर