हरियाणा में खरीदार न मिलने से हरियाणा गो सेवा आयोग के जैविक खाद के 50 हजार बैग पर संकट खड़ा हो गया है। आयोग को कृषि विभाग के खाद खरीदने की उम्मीद थी, लेकिन विभाग ने सीधी खरीद से पल्ला झाड़ लिया है। अब आयोग खाद बेचने के लिए अमेजॉन व फ्लिपकार्ट की मदद लेने की तैयारी में है, साथ ही सेवन सिस्टर्स राज्यों पर नजर है।
आयोग के सचिव डॉ. चिरंतन कादियान ने कहा कि जैविक खाद बनाने से गोशालाएं आत्मनिर्भर बन रही हैं। गायों के गोबर से मीथेन बनती है जो जलवायु को गर्म करती है। गोबर से खाद बनने पर मीथेन बनने में कमी आएगी। रासायनिक खादों पर आत्मनिर्भर नहीं रहना पड़ेगा। जमीन की उर्वरता खत्म नहीं होगी। कृषि विभाग को इसे अधिक से अधिक किसानों तक पहुंचाना चाहिए। जैविक खाद को अमेजॉन व फ्लिपकार्ट के जरिये बेचने की तैयारी भी कर रहे हैं। दोनों की वेबसाइट पर उत्पाद को डाला जा रहा है। पुराना उत्पाद बिकेगा, तभी तो नया बनाएंगे।
आयोग ने असम, मिजोरम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर व सिक्किम सरकार से संपर्क किया है। इन्होंने जैविक खाद के इस्तेमाल में रुचि दिखाई है। हालांकि, अभी यहां से खरीद का आर्डर नहीं आया है। केंद्र सरकार इन राज्यों को पूरी तरह से जैविक खेती आधारित बनाने की तैयारी में है, जिससे आयोग को खाद बिकने की उम्मीद बंधी है।
कृषि विभाग के निदेशक डॉ. हरदीप सिंह ने कहा कि गो सेवा आयोग को जैविक खाद अपनी पंजीकृत गोशालाओं में रखकर बेचनी चाहिए। विभाग के पास इसकी बिक्री के लिए कोई वेंडर नहीं है। वे किसानों को इसके उपयोग के लिए प्रेरित कर सकते हैं, दफ्तरों में रखकर इसे नहीं बेचा जा सकता। आयोग को हैफेड, बीज विकास निगम और अन्य आयोगों से संपर्क करना चाहिए। चूंकि, बिक्री केंद्र निगमों के ही होते हैं।