पीजीआई की आर्गन डोनेशन की मुहिम रंग लाने लगी है। शुक्रवार को 56 वर्षीय पवन ने चार लोगों को नई जिंदगी दी थी। इसके ठीक एक दिन बाद पंचकूला निवासी जसबीर सिंह ने चार को नया जीवन दिया है। जसबीर की किडनी और आंखें सुरक्षित तरीके से निकाली गईं।
दोनों किडनियां फोर्टिस हास्पिटल को सौंप दी गई हैं, क्योंकि इस मैचिंग का मरीज पीजीआई में नहीं था। पीजीआई, फोर्टिस हास्पिटल, मोहाली और चंडीगढ़ ट्रैफिक पुलिस के बीच को-ऑर्डिनेशन की मदद से किडनी को तुरंत फोर्टिस हास्पिटल पहुंचाई गईं, जबकि आंखों को सुरक्षित रख लिया गया है।
एक्सीडेंट के बाद लाया गया था पीजीआई
जसबीर सिंह का 12 मई को एक्सीडेंट हो गया था। इसके बाद उन्हें पंचकूला सेक्टर-छह स्थित हास्पिटल में भर्ती कराया गया। हालत बिगड़ने पर पीजीआई लाया गया। पीजीआई के डॉक्टरों ने उन्हें बचाने के लिए काफी कोशिश की, लेकिन वे सफल नहीं हुए। शुक्रवार शाम साढ़े छह बजे जसबीर को ब्रेन डेड घोषित कर दिया गया। ट्रांसप्लांट को-ऑर्डिनेटर ने जसबीर के परिजनों से बातचीत की। परिजनों ने आपस में चर्चा की और अंग डोनेट करने की स्वीकृति दे दी।
पीजीआई में नहीं मिला था मैचिंग
परिजनों से स्वीकृति मिलने के बाद पीजीआई ने मैचिंग ढूंढना शुरू कर दिया, लेकिन कोई भी जरूरतमंद मरीज नहीं मिल पाया, जो मिले वे काफी दूर थे। उनका इतनी जल्दी पहुंच पाना मुश्किल था। इस स्थिति में रीजनल आर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट आर्गनाइजेशन (रोटो) ने तुरंत नेशनल आर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट आर्गनाइजेशन (नोटो) से संपर्क किया और सूचना दी कि वे जल्द से जल्द मैचिंग डोनर के बारे में बताएं। नोटो ने जब अपने नेटवर्क के माध्यम से मरीज को ढूंढना शुरू किया तो उन्हें फोर्टिस में दो मरीज मिल गए।
पीजीआई से फोर्टिस तक बनाया गया ग्रीन कॉरिडोर
नोटो से सूचना मिलने के बाद फोर्टिस (मोहाली) की आर्गन ट्रांसप्लांट टीम के सदस्य डॉ. प्रियदर्शनी रंजन और डॉ. अश्विनी शर्मा पीजीआई पहुंचे। इसके बाद चंडीगढ़ और मोहाली प्रशासन व पुलिस से संपर्क किया गया। एक बजकर दो मिनट पर पीजीआई से फोर्टिस अस्पताल की एडवांस एंबुलेंस रवाना हुई। मात्र 15 मिनट के भीतर एंबुलेंस फोर्टिस पहुंच गई और ऑपरेशन शुरू कर दिए गए। फोर्टिस हास्पिटल के मुताबिक एक किडनी 45 वर्षीय महिला व दूसरी 47 वर्षीय पुरुष को ट्रांसप्लांट की गई।
ऐसे पूरा हुआ ऑपरेशन
13 मई शाम छह बजे : नोटो से फोर्टिस हास्पिटल को सूचना मिली।
नौ बजे : फोर्टिस ने रिसीपीएंट को सूचना दी।
14 मई सुबह दस बजे : डोनर को पीजीआई इमरजेंसी में शिफ्ट किया गया।
साढ़े दस बजे : डोनर के अंग निकालने के लिए ऑपरेशन शुरू हुआ।
बारह बजे : आर्गन सुरक्षित निकाले गए। फिर उन्हें पैक किया गया।
एक बजकर दो मिनट : पुलिस पायलट के साथ एंबुलेंस पीजीआई के लिए रवाना हुई।
एक बजकर 17 मिनट : एंबुलेंस फोर्टिस हास्पिटल पहुंची।
दो बजे : पहला ऑपरेशन शुरू हुआ। साढ़े तीन बजे खत्म हुआ।
साढ़े तीन बजे : दूसरा ऑपरेशन हुआ। शाम सवा छह बजे दूसरी किडनी ट्रांसप्लांट हुआ।
कोट
लोगों का माइंडसेट अब बदल रहा है। लोग अब आर्गन डोनेशन के लिए आगे आ रहे हैं। शनिवार को आर्गन ट्रांसप्लांट रोटो, नाटो और हास्पिटल के सटीक को-ऑर्डिनेशन की वजह से सक्सेसफुल हो पाया।
-डॉ. विपिन कौशल, नोडल आफिसर रोटो
क्या हैं नोटो और रोटो
दरअसल आर्गन डोनेशन के प्रति जागरूकता और देश के सभी हास्पिटल के बीच को-ऑर्डिनेशन के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने नेशनल आर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट आर्गनाइजेशन (नोटो) बनाया गया है। इसका काम देश के सभी बड़े अस्पतालों के बीच नेटवर्किंग कायम करना है। राज्यों के बीच को-ऑर्डिनेशन बनाने के लिए रोटो को विकसित किया गया। इस रीजन में रोटो का सेंटर पीजीआई को बनाया गया है। इसके अंतर्गत पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, चंडीगढ़, राजस्थान और उत्तराखंड के अस्पताल आएंगे।