चंडीगढ़। चंडीगढ़ पावर डिस्ट्रीब्यूशन लिमिटेड (सीपीडीएल) की ओर से बिजली की दरें बढ़ाने का चौतरफा विरोध होने लगा है। आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के साथ शहर के व्यापारी संगठन व आम लोग भी विरोध में उतर आए हैं। सीपीडीएल ने संयुक्त विद्युत नियामक आयोग (जेईआरसी) में याचिका दाखिल कर 500 यूनिट बिजली की खपत पर करीब करीब 166 बढ़ाने का प्रस्ताव दिया गया है। इस मामले में 25 जुलाई को जन सुनवाई तय है।
आप के प्रदेश अध्यक्ष विजयपाल सिंह ने सवाल उठाया कि जब यह बिजली विभाग सरकार के अधीन था, तब यह लाभ में था और करोड़ों का मुनाफा कमा रहा था। अब जब इसे निजी कंपनियों को सौंपा गया है तो घाटा कैसे दिखाया जा रहा है। कहा कि अब इस घाटे का बोझ आम जनता पर डालना पूरी तरह अनुचित है। आप नेता विक्रांत ए तंवर ने कहा कि यह पूरी प्रक्रिया एक सुनियोजित योजना का हिस्सा लगती है, जिसमें मुनाफे वाली सेवा को निजी कंपनियों को सौंप कर घाटा दिखाया गया और अब जनता से उसकी भरपाई की जा रही है। आप ने कहा कि जब तक घाटे का स्वतंत्र ऑडिट नहीं किया जाता और उसकी रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं होती, तब तक कोई टैरिफ वृद्धि लागू नहीं होनी चाहिए। अगर यह प्रस्ताव वापस नहीं लिया गया तो जन आंदोलन करेंगे।
विभाग को खरीदने के पांच महीने में ही दाम में बढ़ोतरी का प्रस्ताव
चंडीगढ़ में बिजली वितरण कंपनी सीपीडीएल ने बिजली दरों में संशोधन की मांग की है। विभाग का कार्यभार संभालने के लगभग पांच महीने बाद कंपनी ने जेईआरसी को एक याचिका दायर कर वित्त वर्ष 2025-26 से 2029-30 तक के लिए कुल राजस्व आवश्यकता और नई टैरिफ दरों को निर्धारित करने की मांग की है। बिजली कंपनी के प्रस्ताव के अनुसार अगर कोई उपभोक्ता एक महीने में 500 यूनिट बिजली की खपत करता है तो उसका बिल लगभग 166 बढ़ सकता है। वर्तमान में यह बिल लगभग 2,182 आता है जो कि नए प्रस्ताव के अनुसार 2,348 हो जाएगा।
25 जुलाई को जेईआरसी जानेगा लोगों की राय
कंपनी ने बिजली की खपत की स्लैब प्रणाली में भी बदलाव किया है। अब तक जहां तीन स्लैब थे। 0–150 यूनिट, 151–400 यूनिट, और 400 यूनिट से ऊपर, अब उन्हें बदलकर हर 100 यूनिट पर आधारित पांच स्लैब बना दिए गए हैं। इस टैरिफ योजना पर अब 25 जुलाई को जेईआरसी द्वारा एक सार्वजनिक सुनवाई आयोजित की जाएगी, जिसमें उपभोक्ताओं की राय भी ली जाएगी।
कंपनी ने बिजली मांग का विश्लेषण भी किया
कंपनी ने अप्रैल 2024 से मार्च 2025 तक की बिजली खपत के आंकड़ों के विश्लेषण भी किया है। पाया है कि मई से अगस्त तक के चार महीनों में दोपहर के समय (दोपहर 3 से शाम 5 बजे तक) बिजली की सबसे अधिक औसत मांग दर्ज की गई है। यह समय गर्मियों का होता है, जब कूलर, पंखे और एसी की खपत अधिक होती है। अप्रैल और अक्तूबर के दो महीनों में शाम के समय (शाम 7 से 8 बजे तक), दिसंबर से फरवरी तक के तीन महीनों में सुबह के समय (सुबह 8 से 10 बजे तक) और सितंबर महीने में दो बार मांग सबसे अधिक रहती है। एक बार दिन में (3 से 4 बजे) और दूसरी बार रात को (8 से 9 बजे)। वहीं, नवंबर और मार्च के दो महीनों में सुबह (8 से 9 बजे) और शाम (7 से 8 बजे) बिजली की सबसे अधिक औसत मांग दर्ज की गई है।
सड़क से लेकर सदन तक होगा विरोध
सीपीडीएल कंपनी उपभोक्ताओं को जेब पर डाका डालने आई है। बिजली विभाग के निजीकरण के फैसले के खिलाफ पार्टी ने 10 दिन तक भूख हड़ताल की थी। पार्टी सड़क से लेकर सदन तक इसका विरोध जताएगी। यह जनता की जेब काटने वाला फैसला साबित होगा। -एचएस लक्की, चंडीगढ़ प्रदेश अध्यक्ष कांग्रेस
मुनाफे से अचानक घाटे में कैसे आ गए
सरकारी व्यवस्था में बिजली विभाग मुनाफे में था। निजी हाथ में जाते ही अचानक घाटे में कैसे आ गया। मौजूदा समय में सर्विस खराब हो गई है। कर्मचारी कम कर दिए गए। पहले अगर बिजली कटती थी तो जल्द ठीक हो जाती थी लेकिन अब तक घंटों कोई नहीं आता है। बिजली का रेट बढ़ाना कहीं से भी उचित नहीं है। -संजीव चड्ढा, अध्यक्ष, चंडीगढ़ व्यापार मंडल
रेट बढ़ाने का फैसला गलत
रेट बढ़ाने का फैसला गलत है। सुविधाएं जीरो हैं। ट्रांसफॉर्मर जर्जर हो चुके हैं। आम आदमी की जेब पर बोझ पड़ेगा। इसका विरोध होना चाहिए। शहर में मध्यम वर्ग के लोग ज्यादा रहते हैं। इससे बेहतर तो सरकारी सिस्टम में बिजली चल रही थी। -कुलजिंदर सरां, सेक्टर-33, चंडीगढ़
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आगामी पांच साल में 956 करोड़ रुपये निवेश करेगा सीपीडीएल
शहर में कई जगहों पर बिजली वितरण प्रणाली पुरानी और जीर्ण-शीर्ण हो चुकी है। करीब 50 फीसदी उपकरण और ढांचे खराब होने लगे हैं। इसे देखते सीपीडीएल कंपनी बिजली के उपकरणों पर अगले पांच साल में 956 करोड़ निवेश करने जा रही है। सीपीडीएल के निदेशक अरुण कुमार वर्मा का कहना है कि बिजली वितरण नेटवर्क में बड़े पैमाने पर उन्नयन किया जाएगा जिसमें नए बिजली ट्रांसफार्मर, भूमिगत केबल और पुराने उपकरणों को बदला जाना है। इसके साथ बिजली वितरण प्रणाली को मजबूत किया जाएगा ताकि ब्रेकडाउन को खत्म किया जा सके।