एक जुलाई से लागू होने जा रहे गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स के विरोध में पंजाब के व्यापारियों ने तीस जून को पंजाब बंद का एलान किया है। व्यापार मंडल, पंजाब ने देशव्यापी बंद में शामिल होने का फैसला किया है।
मंडल के प्रधान प्यारे लाल सेठ ने कहा कि केंद्र सरकार ने जीएसटी में सर्च एंड सीजर, प्रॉसिक्यूशन जैसे कई प्रावधान बेहद गलत रखे हैं। छोटे से छोटे कारोबारी को भी कंप्यूटर रखना होगा, अंग्रेजी में बिल बनाना होगा। कपड़े पर 1957 से आज तक कोई टैक्स नहीं था, धागे पर भी 18 प्रतिशत जीएसटी लगा दिया गया है। इसकेविरोध में पंजाब केकपड़ा व्यापारी 27 जून से हड़ताल पर चल रहे हैं। इतना ही नहीं, अगर कोई व्यापारी किसी ऐसे व्यक्ति से जॉब वर्क कराएगा, जो रजिस्टर्ड नहीं है, तो काराबोरी को 18 फीसदी टैक्स देना होगा। मंडल के महासचिव महिंदर अग्रवाल ने कहा कि कारोबारियों को हर आईटम का अलग एचएसएन कोड देना होगा, स्टॉक रजिस्टर मेंटेन करना होगा।
छोटे परचून दुकानदारों के लिए कहां संभव है। उन्हें भी अकाउंटेंट रखना होगा। सरकार का अपना इंफ्रास्ट्रक्चर अभी पर्याप्त नहीं है तो दुकानदारों का कहां से होगा। जीएसटी की वेबसाइट आए दिन बैठ जाती है। केंद्र सरकार ने जीएसटी काउंसिल में व्यापारियों के एक भी नुमाइंदे को शामिल नहीं किया। जो सरकार को बता सकता कि जमीनी स्तर पर क्या समस्याएं आ रही हैं। एक्साइज टैक्सेशन विभाग बड़ी संख्या में ट्रेनिंग प्रोग्राम आयोजित करने के दावे कर रहा है, लेकिन जमीनी स्तर पर ऐसा कुछ भी नहीं हुआ है कि व्यापारियों को व्यवहारिक तौर पर जानकारी दी गई हो। इसी केविरोध में एक दिन का बंद रखने का फैसला किया गया है।