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सुरजीत ने कहा, कांग्रेस के कारण हुआ ऑपरेशन ब्लू स्टार

Fri, 14 Feb 2014 10:02 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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स्वर्ण मंदिर में ऑपरेशन ब्लू स्टार को लेकर कैप्टन अमरिंदर द्वारा मुख्यमंत्री बादल के खिलाफ शुरू की गई मुहिम में बादल को पूर्व मुख्यमंत्री सुरजीत सिंह बरनाला का साथ मिल गया है।
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शिअद का विरोध करते हुए बरनाला ने वीरवार को अमर उजाला से बातचीत में न सिर्फ कैप्टन के आरोपों को झुठलाया बल्कि यह भी दावा किया कि ऑपरेशन ब्लू स्टार के लिए केवल कांग्रेस जिम्मेदार थी।

अकाली नेताओं को इसके बारे में कोई जानकारी नहीं थी। उस समय जो नेता श्री दरबार साहिब परिसर में थे, उन्हें ऑपरेशन के दौरान ही 6 जून 1984 को गिरफ्तार कर लिया गया था। जो नेता अन्य स्थानों पर थे, उन्हें कुछ दिन बाद हिरासत में लिया गया।
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अकाली दल लौंगोवाल के सुप्रीमो सुरजीत सिंह बरनाला ने अपने निवास पर विशेष बातचीत के दौरान शिअद के पूर्व अध्यक्ष संत हरचंद सिंह लौंगोवाल द्वारा पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के निजी सचिव आरके धवन को लिखे गए पत्र पर संदेह जताते हुए कहा कि एक मौके पर मैंने भी भिंडरांवाला का विरोध किया था। इसी कारण 1985 के पंजाब विधानसभा चुनाव में मुझे निरंतर आतंकियों की धमकियां मिलती रहीं।

बरनाला ने कहा कि उन्हें ऑपरेशन ब्लू स्टार शुरू होने के बारे में जानकारी उनके एक वकील मित्र से फोन पर मिली। उस समय वह चंडीगढ़ में थे। इससे पहले लौंगोवाल द्वारा 2 जून 1984 को श्री दरबार साहिब परिसर में बुलाई गई पार्टी की बैठक की भी उन्हें कोई जानकारी नहीं थी, हालांकि मैं उस समय दल का महासचिव था।

उन्होंने आगे कहा कि 3 जून को सैन्य कार्रवाई की सूचना मिलने के बाद उन्होने अमृतसर संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन वहां फोन कट चुके थे। उस समय बादल कहां थे, इसकी उन्हें कोई जानकारी नहीं थी।

उन्होंने कहा कि इस बात की भी उन्हें कोई जानकारी नहीं है कि बादल कभी अकेले किसी केंद्रीय मंत्री से मिले थे। बरनाला ने कहा,‘‘6 जून, 1984 को में पंजाब के तत्कालीन राज्यपाल बीडी पांडेय से मिला और अमृतसर जाने की इजाजत मांगी, जो नहीं मिली।

11 जून को बादल ने मुझे फोन करके कहा कि उन्होंने 12 जून को संवाददाता मार्क टुली को मिलने जाना है। निकलने का समय सुबह 6 बजे का तय हुआ, लेकिन पुलिस ने मुझे चंडीगढ़ स्थित एमएलए फ्लैट्स से तड़के साढ़े तीन बजे गिरफ्तार कर लिया। बादल को उनके निवास से हिरासत में लिया गया। दोनों को पहले बुड़ैल जेल रखा गया और फिर भोपाल के रास्ते पंचमढ़ी ले जाया गया।’’

संत लौंगोवाल के हस्ताक्षर अलग थे
कैप्टन अमरिंदर द्वारा जारी किए गए लौंगोवाल के हस्तारक्षर वाले पत्र के बारे में बरनाला ने कहा कि पत्र की प्रति गौर से देखने के बाद इस पत्र पर किए गए हस्ताक्षर संत लौंगोवाल के प्रतीत नहीं होते। उनके हस्ताक्षर अलग थे।

कैप्टन की भूमिका कांग्रेस छोड़ने तक सीमित
बरनाला ने कहा कि पंजाब मसले के संबंध में कैप्टन अमरिंदर सिंह की भूमिका केवल इतनी थी कि वह ऑपरेशन ब्लू स्टार के विरोध में कांग्रेस छोड़कर शिअद में शामिल हुए और उनकी सरकार में मंत्री बने।

बाकी केंद्रीय मंत्रियों के साथ बैठकों के लिए अकाली दल के नेताओं को सीधे कॉल आती थी और पार्टी की तरफ से मुख्य तौर पर लौंगोवाल, बादल, टोहड़ा और स्वयं मैं ही शामिल होते थे।

मैंने किया भिंडरांवाला का विरोध
पूर्व मुख्यमंत्री बरनाला ने कहा कि जरनैल सिंह भिंडरांवाला से उनकी दो बार मुलाकात हुई थी। एक बार श्री आनंदपुर साहिब में माथा टेकते वक्त और दूसरी बार अमृतसर स्थित शिअद कार्यालय में कार्यकारिणी की बैठक के दौरान।

बैठक में पहुंच कर भिंडरांवाला ने कहा था कि सभी अकाली विधायक त्याग पत्र दे दें। लेकिन मैंने इसका विरोध किया और पूछा कि इससे क्या होगा? इस पर भिंडरावाला ने कहा कि सब कुछ हिलाकर रख देंगे, लेकिन मैंने उनकी बात नहीं मानी।
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