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इंसानों की मौजूदगी में जब गिद्धों ने किया उड़ान भरने से इंकार

Sun, 05 Jun 2016 06:18 PM IST
अरविंद बाजपेयी/अमर उजाला, पिंजौर
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पिंजौर स्थित जटायु संरक्षण और प्रजनन केंद्र - फोटो : amar ujala
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इंसानों की मौजूदगी में जब गिद्धों ने किया उड़ान भरने से इंकार। दरअसल एक बंद पक्षी को जब खुला आसमां मिलता है तो वह उसकी खुशी की इंतेहा होती है। यहां पिंजरा भी खुला था और जंगल की हरियाली भी थी। सभी बेसब्री से उड़ने का इंतजार भी कर रहे थे। लेकिन उड़ान भरना तो दूर गिद्ध अपनी जगह से हिले तक नहीं। कारण था इंसान, जिसकी मौजूदगी ने गिद्धों को सचेत कर दिया था।
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पिंजरा खुला रहा पर गिद्ध अपने पिंजरे में ही मंडराते रहे। जिन गिद्धों के लिए इस वल्चर सेंटर के पिंजरे को खोला गया उनको टैग से जाना जाता है। उसमें एक है बी-19 और दूसरा बी-20। यह दोनों (मेल और फीमेल) हिमालयन ग्रिफन हैं और उनकी उम्र करीब दस साल है।

पिंजौर स्थित जटायु संरक्षण और प्रजनन केंद्र में शुक्रवार को समारोह का आयोजन किया गया था। समारोह के मुख्य अतिथि केंद्रीय वन, पर्यावरण और जलवायु मंत्री प्रकाश जावेडकर थे, जिन्होंने हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर और हरियाणा के वनमंत्री राव नरबीर सिंह की मौजूदगी में दो गिद्धों को रिलीज किया। 
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सेंटर में कार्यरत बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सेंटर के प्रिंसिपल साइंटिस्ट डा. विभू प्रकाश ने बताया कि यह गिद्धों का जोड़ा काफी समय से साथ में रहता है। दोनों एक दूसरे का काफी ख्याल रखते हैं। जंगल में शोरगुल और इंसान होने पर यह थोड़ा सचेत हो जाते हैं। इसीलिए यह नहीं उड़े। उन्होंने बताया कि जो गिद्ध उनसे मिलने के लिए रोजाना आते हैं वह भी नहीं आए यह भी एक वजह हो सकती है, जिस कारण वह नहीं उड़ सके। इनकी उड़ान करीब तीस हजार फीट की ऊंचाई तक होती है।

छह साल पहले हुआ था प्यार डा. विभू प्रकाश ने बताया कि गिद्धों के जोड़ों के बीच प्यार करीब छह साल पहले हुआ था। इस दौरान नर गिद्ध ने मादा गिद्ध को पेड़ की टहनी दी थी। मादा ने इस टहनी को स्वीकार कर लिया था। उन्होंने कहा कि प्यार होने पर गिद्ध (मेल) दूसरे गिद्ध (फीमेल) को टहनी भेंट करता है और उसी के अनुसार जोड़ा बनता है। उन्होंने कहा कि यह जोड़ा हमेशा साथ में रहता है। यदि नर गिद्ध की दी गई टहनी मादा स्वीकार नहीं करती है और उसको मारकर भगा देती है तो दोनों एक दूसरे से अलग हो जाते हैं। डा. विभू प्रकाश ने बताया कि यह जोड़ी उम्रभर साथ रहती है और यदि दोनो में से किसी एक की मौत हो जाती है तो यह दूसरा जोड़ा बनाते हैं।
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जटायु संरक्षण और प्रजनन केंद्र में गिद्धों के तीन प्रजातियों का संरक्षण

पिंजौर स्थित जटायु संरक्षण और प्रजनन केंद्र - फोटो : amar ujala
बायोलॉजिस्ट करेंगे इनका निरीक्षण बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सेंटर के प्रिंसिपल साइंटिस्ट डा. विभू प्रकाश ने बताया कि इन गिद्धों को छोड़ने के बाद इन पर लगातार नजर रखी जाएगी। इसीलिए गिद्धों के टैग लगाए गए हैं, जोकि काफी दूर से दिखाई देते हैं। उन्होंने कहा कि इसके साथ ही इन गिद्धों के रिंग भी डाली गई है, जो पहचान करेगी। इस प्रजाति की खूबी है कि यह ज्यादा उड़ता नहीं है और अक्सर पेड़ों पर बैठ जाते हैं। जिससे उनको खोजना ज्यादा मुश्किल नहीं है।

तीन प्रजातियों का हो रहा संरक्षण विभू प्रकाश ने बताया कि जटायु संरक्षण और प्रजनन केंद्र में तीन प्रजातियों का खास रूप से संरक्षण किया जा रहा है। इसमें व्हाइट बैक्ड वल्चर, लांग वाइल्ड वल्चर और स्लेंडर वाइल्ड वल्चर हैं। यह प्रजातियां लुप्त होती जा रही हैं। उन्होंने कहा कि इस वल्चर सेंटर में फिलहाल 253 गिद्ध हैं। जिनको संरक्षित किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि देश में फिलहाल आठ प्रजनन और संरक्षण केंद्र हैं जिसमें कुल पांच सौ गिद्ध हैं।

एक सप्ताह में पांच किलो मीट डा. विभू प्रकाश ने बताया कि इन गिद्धों को प्रति सप्ताह पांच किलो बकरे का मीट दिया जाता है। उन्होंने बताया कि गिद्धों की खूबी है कि यह अनुशासन में रहते हैं। इनमें जो सबसे ज्यादा भूखा होता है उसको भोजन सबसे पहले दिया जाता है।

वातावरण के अनुरूप ढाले गए
डा. विभू प्रकाश ने बताया कि गिद्धों को बाहर के वातावरण के अनुरूप बनाने के लिए उनके पिंजरे के भीतर और बाहर बकरे का मीट डाल दिया जाता है। जिससे कि बाहरी गिद्ध भी आते हैं और उनसे पिंजरे में बंद गिद्धों का मेल मिलाप भी होता है। पिंजरे भी खुले बनाए गए हैं जिसमें यह स्वच्छंदता से उड़ान भर सकें।
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