पंजाब विश्वविद्यालय नए शैक्षिक सत्र की परीक्षाएं समय पर करवाएगी। तैयार किए गए शैक्षिक कैलेंडर में इसको शामिल कर दिया है। इससे छात्रों का समय बर्बाद नहीं होगा। साथ ही उन्हें समय पर रिजल्ट व डिग्रियां मिल सकेंगी। इस बार कोरोना के कारण मई-जून में होने वाले सेमेस्टर एग्जाम पीयू नहीं ले पाई। कुछ छात्रों ने परीक्षाओं की तैयारी की थी तो कुछ ने नहीं।
कुछ प्रमोट की मांग कर रहे थे। सत्र लगातार लेट होता देखकर यूजीसी ने आदेश दिए कि पहले व दूसरे सेमेस्टर के छात्रों को प्रमोट कर दिया जाए। विश्वविद्यालय अपने स्तर से इसके लिए गाइडलाइंस तैयार कर लें और मानक बना लें। इसी को ध्यान में रखकर छात्रों को प्रमोट किया जा रहा है। यह केवल एक ऑप्शन है।
शिक्षा का आधार परीक्षा से जुड़ा है। इसी को ध्यान में रखकर पीयू अगले शैक्षिक सत्र की परीक्षाएं समय पर कराने के लिए तैयार है। दिसंबर में पहले सेमेस्टर एग्जाम होंगे। उसके बाद मई व जून में एंड सेमेस्टर परीक्षाएं होंगी। सूत्रों का कहना है कि पीयू प्रशासन अपने कैलेंडर के मुताबिक ही परीक्षाएं करवाने के लिए तैयारी कर रहा है। साथ ही नए शैक्षिक सत्र का संचालन भी उसी तरह से किया जाएगा ताकि सब कुछ समय के मुताबिक हो सके।
पांच अगस्त के बाद रिसर्च स्कॉलर्स को बुला सकता है पीयू
पीयू अपने रिसर्च स्कॉलर्स को पांच अगस्त के बाद कैंपस आने की अनुमति दे सकता है। इसके लिए शिक्षक लगातार पीयू प्रशासन पर दबाव बना रहे हैं। उन्होंने फिर पीयू प्रशासन को अपने अपने सुझाव भेजे हैं। इसमें कहा है कि एक साथ सभी स्कॉलर्स को न बुलाकर रोस्टर के अनुसार बुलाया जा सकता है।
पीयू में 700 से अधिक रिसर्च स्कॉलर हैं। इनके रिसर्च प्रारंभिक हैं तो किसी का अंतिम चरण में। लॉकडाउन के कारण सभी रिसर्च का कार्य प्रभावित हो गया। यह किसी भी क्षेत्र का भ्रमण नहीं कर पाए और न ही इन्हें गाइड मिल सके। फोन पर जरूर शिक्षकों ने इनकी बात हो रही है लेकिन उनके द्वारा लिखे गए थिसिस की जांच शिक्षक नहीं कर पा रहे हैं। लगातार शिक्षकों पर दबाव बढ़ रहा है।
रिसर्च का काम समय पर पूरा न होने के कारण रिसर्च स्कॉलर्स पासआउट भी नहीं हो पाएंगे और डिग्री भी नहीं मिलेगी। ऐसे में शिक्षकों ने पीयू प्रशासन से फिर आग्रह किया है। कहा है कि जब विद्यार्थी हॉस्टलों में रुके हुए हैं तो रोस्टर के अनुसार रिसर्च स्कॉलर्स को भी पीयू बुलाया जाए। इसके लिए रास्ते निकाले जा सकते हैं। हर विभाग अपने-अपने रिसर्च स्कॉलर्स को सप्ताह में दो बार बुला सकते हैं। इससे समस्या का कुछ हद तक हल निकलेगा। अब पीयू प्रशासन आगामी कार्य योजना तैयार कर रहा है।