पुराने सामान की खरीद-फरोख्त करने वाली ऑनलाइन वेबसाइट पर इस गिरोह के सदस्यों ने कई तरह के सामान खासकर मोबाइल अपलोड किए हुए हैं, जिनकी कीमत कम रखते है। कम मूल्य की वजह लोग जब इस डील की ओर आकर्षित होते हैं तो उस व्यक्ति को मोबाइल बेचने वाले व्यक्ति की पहचान सेना के एक जवान के रूप में बताई जाती है।
इसके लिए संबंधित जवान का आर्मी द्वारा जारी पहचान पत्र, आधार कार्ड और कैंटीन कार्ड तक खरीदने की इच्छा जताने वाले व्यक्ति को व्हॉटसएप पर भेज दिया जाता है। डील फाइनल होने पर संबंधित व्यक्ति को मोबाइल का मूल्य संबंधित अकाउंट में पेटीएम करने को कहा जाता है। उसके बाद संबंधित मोबाइल की पैकिंग व उसे खरीददार के पते पर कूरियर करने की रसीद की फोटो तक खरीददार को भेजी जाती है। ताकि उसका भरोसा और पुख्ता हो जाए।
सामने आई इस तरह की कूरियर रसीद के हेडर पर इंडियन आर्मी छपा है और उस पर पता इंडियन आर्मी कैंप जैसलमेर का पता लिखा है। बाद में न तो खरीददार के पास मोबाइल पहुंचता है और न ही पेटीएम किया पैसा वापस आता है। संबंधित मोबाइल नंबर भी स्विच ऑफ हो जाते हैं और वही फोन किसी दूसरे नंबर से फिर ऑनलाइन मार्केट में अपलोड कर दिया जाता है।