मनोहर लाल खट्टर को मुख्यमंत्री बने बुधवार को एक माह पूरा हो गया। इस अवधि में खट्टर ने पिछली हुड्डा सरकार के कई फैसलों को पलटने के साथ ही प्रशासनिक अधिकारियों पर लगाम लगाने समेत कई अहम फैसले लिए। सबसे बड़ा फैसला कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति की आयु सीमा 60 से कम करके 58 साल करने का रहा।
अपने एक माह के कार्यकाल में मुख्यमंत्री खट्टर ने अपने फैसलों से यह एहसास नहीं होने दिया कि वह पहली बार विधायक एवं मुख्यमंत्री बने हैं और उनमें प्रशासनिक अनुभव की कमी है। इस एक माह के कार्यकाल में मुख्यमंत्री ने कैबिनेट की तीन बैठकें कर अपनी सक्रियता का परिचय देने का प्रयास किया।
इसी दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गाइड लाइन से प्रदेश में एक नवंबर से स्वच्छता अभियान और 31 अक्तूबर को सरदार वल्लभ भाई पटेल की जयंती को एकता दिवस का नाम देकर लोगों को लुभाने का भी प्रयास किया। जबकि संत रामपाल की गिरफ्तारी से पहले पैदा हुए विवाद को भी बगैर खूनखराबा के शांतिपूर्ण तरीके से निपटा कर पुख्ता कानून व्यवस्था बनाए रखने का संदेश दिया।
खर्चे कम करने की नीति खुद पर की लागू
मुख्यमंत्री ने अपनी सुरक्षा में जुटे कर्मचारियों की संख्या कम करके सरकारी खर्चे को भी कम करने का संदेश दिया है। इसके साथ ही 50 करोड़ की लागत से नया हवाई जहाज खरीदने की योजना को रद्द कर दिया।
एक माह में हरियाणा सरकार के अहम फैसले
- पिछली हुड्डा सरकार के फैसलों पर रोक लगाते हुए समीक्षा करने का फैसला। पंजाब की तर्ज पर कर्मचारियों के वेतन और बुजुर्गों की बढ़ी हुई पेंशन के निर्णय पर एक नवंबर से रोक लगा दी।
- हरियाणा पुलिस भर्ती में इंटरव्यू की प्रथा बंद कर दी गई।
सभी जिलों में सीएम विंडो शुरू
- सभी जिलों में सीएम विंडो शुरू
- बुजुर्गों की पेंशन 200 रुपये बढ़ाकर 1200 रुपये की। हर साल दो सौ रुपये बढ़ाने की घोषणा। जबकि भाजपा ने घोषणा पत्र में वृद्धावस्था पेंशन दो हजार रुपये करने का दावा किया था।
- प्रदेश के किसी भी थाने में दर्ज कराया जा सकता है आपराधिक मामला।
- डीजल पर वैट बढ़ाया।
- छह नेशनल हाईवे से खत्म किया टोल टैक्स।
- कर्मचारी चयन आयोग के चेयरमैन, सदस्यों को हटाया।
- हरियाणा टीचर चयन बोर्ड भंग।
कोट्स-----------
यह फैसला वापस लेने वाली सरकार है। खट्टर सरकार ने किसान, गरीब और कर्मचारी विरोधी फैसले लिए हैं। वैट बढ़ाकर किसानों पर बोझ डाला है, जबकि किसान पहले से सूखे के साथ ही कई दूसरी समस्याओं से जूझ रहे हैं। डीजल का रेट बढ़ने से खाने-पीने की वस्तुएं भी महंगी हो जाएंगी।
- किरण चौधरी, नेता, कांग्रेस विधायक दल।