राम रहीम के समर्थकों ने पंचकूला को जला दिया था। 35 लोग मारे गए, लेकिन जख्म इतने गहरे हैं कि एक महीने बाद भी तबाही का वो मंजर नहीं भूलता। ये कहना है पंचकूलावासियों का। 25 अगस्त को पंचकूला में जब डेरा सच्चा सौदा प्रमुख को विशेष सीबीआई ने दोषी करार दिया तो उपद्रवियों ने इस कदर कहर बरपाया कि हिंसा के वो जख्म अब भी शहरवासियों के जेहन में कैद हैं।
हिंसा और आगजनी की साजिश के मामले में 170 एफआईआर दर्ज कर, 1016 आरोपियों की गिरफ्तारियां हुईं। लेकिन डेरा प्रकरण में जिन बेगुनाहों की संपत्ति और वाहनों का नुकसान हुआ, उन्हें अब भी मुआवजे का इंतजार है। प्रशासन ने मुआवजे के लिए आवेदन भी मांगे, लेकिन इस दिशा में धीमी पहल से मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। धारा-144 के बावजूद देश के अलग अलग हिस्सों से डेरा समर्थकों की शक्ल में हजारों दंगाई भी पहुंचे, जिनकी वजह से पंचकूला की सड़कों पर इंसानी खून के धब्बे छोड़ दिए।
शहर के कुछ सेक्टरों में दहशत के कारण लोग अपने घरों को छोड़ दूसरे शहरों में भी चले गए थे। दंगाइयों ने न सरकारी दफ्तरों, निजी परिसरों और संस्थानों के अलावा सार्वजनिक संपत्तियों को भी नुकसान पहुंचाया। शहर के महत्वपूर्ण ट्रैफिक लाइट प्वाइंट्स पर लगे सीसीटीवी कैमरे तोड़ दिए गए तो अग्रसेन चौराहा, अग्रवाल भवन, बैंक, होटलों के अलावा सेक्टर-दो और चार के सरकारी दफ्तरों को भी दंगाइयों ने निशाना बनाया। इसमें पंचकूला वासियों को करोड़ों का नुकसान हुआ तो हिंसा में 35 मौतें भी हुईं।