बाहर निकालते ही दोनों श्रमिकों दीपेंद्र और कैलाश को ट्रामा सेंटर ले जाया गया। तीसरा श्रमिक विक्रम गड्ढे में सबसे नीचे की ओर दबा हुआ था, जिसे निकालने में करीब आधे घंटे का वक्त लग गया। उसको बाहर निकालने के बाद ट्रामा सेंटर ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने विक्रम को मृत घोषित कर दिया। मृतक सहित घायल के परिजनों को सूचना दे दी गई, जो देर रात तक रोहतक पहुंचे। दीपेंद्र और कैलाश ट्रामा सेंटर में उपचाराधीन हैं।
सोमवार को ही 10 दिन की छुट्टी के बाद लौटकर आए थे तीनों
राजस्थान के सीकर निवासी नागर मल जाखड़ ने बताया कि वह उक्त प्रोजेक्ट में बतौर ठेकेदार हैं। उनके पास करीब 10 मजदूर काम करते हैं। इन्हीं मजदूरों में ये तीनों मजदूर भी काम कर रहे थे, जो कि उसी के जिले से संबंधित हैं। प्रोजेक्ट 4 माह से चल रहा है। ठेकेदार ने बताया कि ये तीनों सोमवार को ही 10 दिन की छुट्टी के बाद काम पर लौटे थे। मंगलवार सुबह साढ़े 10 से 11 बजे के बीच यह हादसा हो गया।
तीनों ने पहनी हुई थी सेफ्टी किट, मिट्टी में दम घुटने से हुई एक की मौत
घायल दीपेंद्र और कैलाश ने बताया कि साइट पर काम करने से पहले वे सेफ्टी किट पहनते हैं। इसी के तहत मंगलवार को भी सभी श्रमिकों ने सेफ्टी किट पहनी हुई थी। किट में सिर पर हेलमेट, पेट तक एक जैकेट प्रमुख रूप से होते हैं। दोनों घायल श्रमिकों का कहना है कि विक्रम मिट्टी में काफी नीचे की ओर दब गया था, जिससे उसकी दम घुटने से मौत हो गई।