चंडीगढ़। गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (जीएमसीएच) सेक्टर-32 में एकेडमिक काम का बोझ पीजीआई और पीयू से कहीं ज्यादा लग रहा है। पीजीआई व पीयू में एकेडमिक कार्यों के लिए जहां एक रजिस्ट्रार काम संभाल रहे हैं, वहीं जीएमसीएच-32 में अब तीन-तीन रजिस्ट्रार नियुक्त किए गए हैं। कॉलेज प्रशासन ने इस कदम को बढ़ते काम के बोझ से निपटने का तरीका बताया है लेकिन इस फैसले ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं, खासकर तब जब पिछले तीन साल से नियमित रजिस्ट्रार का पद खाली पड़ा है।
जीएमसीएच-32 में नियमित रजिस्ट्रार का पद पिछले तीन साल से खाली है। इस दौरान सेवानिवृत्त रजिस्ट्रार को ही संविदा के आधार पर सेवा विस्तार दिया जा रहा है। नियमों के अनुसार, 60 साल से अधिक उम्र के व्यक्ति को प्रशासनिक जिम्मेदारी नहीं दी जा सकती। बावजूद इसके, संविदा पर तैनात ये रजिस्ट्रार पदभार संभाल रहे हैं।
मुख्य सचिव के आदेश के बाद बीते 12 सितंबर को कॉलेज प्रशासन ने सूची जारी की कि प्रोफेसर एवं बाल रोग विभाग के प्रमुख डॉ. विशाल गुगलानी को वरिष्ठ रजिस्ट्रार (शैक्षणिक) और एसोसिएट प्रोफेसर नेत्र रोग विभाग डॉ. सुदेश कुमार आर्य को सहायक रजिस्ट्रार (शैक्षणिक) नियुक्त किया गया है। ये दोनों ही अपने मूल कर्तव्यों के अलावा यह अतिरिक्त जिम्मेदारी संभालेंगे।
वरिष्ठता का भ्रम अभी भी बरकरार
इस नई व्यवस्था ने सबसे बड़ा सवाल वरिष्ठता को लेकर खड़ा कर दिया है। आदेश में डॉ. विशाल गुगलानी को वरिष्ठ रजिस्ट्रार तो बनाया गया है लेकिन यह साफ नहीं किया गया है कि वे संविदा पर कार्यरत रजिस्ट्रार के अधीन काम करेंगे या उनसे स्वतंत्र होंगे। मेडिकल कॉलेज में चर्चा है कि क्या अब नियमित रूप से नियुक्त वरिष्ठ अधिकारी, संविदा पर काम कर रहे अधिकारी के नीचे काम करेंगे।
प्रशासन की मजबूरी या ढुलमुल रवैया
कॉलेज के डायरेक्टर प्रिंसिपल जीपी थामी का कहना है कि यह कदम काम के दबाव को कम करने और बेहतर प्रबंधन के लिए उठाया गया है। उन्होंने कहा कि इन अतिरिक्त पदों के लिए कोई अलग से वेतन नहीं दिया जाएगा। हालांकि, कई लोगों का मानना है कि यह स्थिति प्रशासन के ढुलमुल रवैये को दिखाती है। अगर काम का बोझ इतना ज्यादा है तो नियमित पद को भरने की प्रक्रिया क्यों शुरू नहीं की जा रही।