प्रदेश में रेमडेसिविर के 61,350 और 731 टोसिलिजुमैब इंजेक्शन का स्टॉक है। फिलहाल पीजीआई रोहतक और मेडिकल कॉलेजों में ब्लैक फंगस के मरीजों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। एक मरीज को रोजाना औसतन 6 इंजेक्शन लगते हैं। पीजीआई रोहतक की एमएस डॉ. पुष्पा दहिया भी कह चुकी हैं कि उनके पास दवा की कमी है और उन्हें मरीजों के हिसाब से अधिक इंजेक्शन की जरूरत है।
वहीं, खुद स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज इस बात को स्वीकार कर रहे हैं। अब सरकार ने फैसला लिया है कि ग्लोबल टेंडर से दवा खरीदी जाएगी लेकिन टेंडर के बाद दवा कब मिलेगी, यह तिथि किसी के पास नहीं है। वहीं प्रदेश में मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
बाजार में पर्याप्त दवा नहीं, आयात करेगी सरकार: विज
ब्लैक फंगस नाम की बीमारी एकदम से सामने आई है। इसके उपचार के लिए बाजार में भी जरूरत के मुताबिक दवा उपलब्ध नहीं है। इंजेक्शन क्योंकि हिंदुस्तान में नहीं मिल रहा और बहुत कम मिला है। केंद्र सरकार भी इसको आयात कर रही है और हमने 12 हजार इंजेक्शन की मांग की है। हरियाणा सरकार ने भी इंजेक्शन आयात करने का फैसला किया है। - अनिल विज, स्वास्थ्य मंत्री।